Tej Pratap And Prashant Kishor meeting: बिहार की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिली है। आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने मंगलवार देर रात जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) से मुलाकात की। यह बैठक पटना के शेखपुरा हाउस स्थित प्रशांत किशोर के आवास पर हुई, जहां दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत चली। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मुलाकात अहम हो सकती है।
बिहार की राजनीति में नया ट्विस्ट (Photo: X/@TejYadav14)
दोनों नेताओं के बीच जनहित और भविष्य की राजनीति को लेकर गंभीर चर्चा-तेज प्रताप
तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस बैठक का जिक्र किया और इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच जनहित और भविष्य की राजनीति को लेकर गंभीर चर्चा हुई। यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि प्रशांत किशोर अक्सर परिवारवाद की राजनीति का विरोध करते रहे हैं। उनके निशाने पर कई बड़े नेता भी रहे हैं। ऐसे में तेज प्रताप यादव के साथ उनकी मुलाकात ने लोगों को चौंका दिया है। इससे यह भी संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में दोनों नेता किसी नए राजनीतिक समीकरण में साथ आ सकते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में दोनों नहीं छोड़ पाए छाप
अगर हाल के चुनावों की बात करें तो दोनों नेताओं के लिए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अच्छे नहीं रहे। तेज प्रताप यादव को अपनी महुआ सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, वहीं प्रशांत किशोर की पार्टी भी चुनाव में खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके बावजूद दोनों नेताओं की यह मुलाकात भविष्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तेज प्रताप यादव ने कहा कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जो आगे चलकर राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बातचीत से उन्हें नई सोच और जनसेवा के लिए और मजबूत प्रेरणा मिली है।
तेज प्रताप यादव ने अपने एक्स पर लिखा: "आज का दिन राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहा। मेरी मुलाकात प्रशांत किशोर जी से हुई, जहां हमने जनहित और भविष्य की राजनीति को लेकर गहन चर्चा की। इस दौरान जनता की अपेक्षाओं और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से बात हुई। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें कई ऐसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ जो आने वाले समय में राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। मैं, तेज प्रताप यादव, इस संवाद को अपने राजनीतिक जीवन के एक महत्वपूर्ण अनुभव के रूप में देखता हूँ, जहाँ सकारात्मक सोच और जनसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का संकल्प और भी मजबूत हुआ।"
