कांग्रेस नेता राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा का समापन अब राजधानी पटना में पदयात्रा के जरिए किया जाएगा। पहले इसके अंत में एक बड़ी सभा करने का कार्यक्रम था, लेकिन अब महागठबंधन ने नई रणनीति अपनाई है। 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा 16 दिन में लगभग 1,300 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद 1 सितंबर को पटना पहुंचेगी।
योजना में फेरबदल
शुरुआत में कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ऐलान किया था कि पटना के गांधी मैदान में विशाल रैली होगी। लेकिन विपक्षी दलों का मानना है कि पदयात्रा से जनता की सीधी भागीदारी और ऊर्जा अधिक दिखाई देगी। कई गठबंधन नेता पहले ही अलग-अलग चरणों में यात्रा का हिस्सा बन चुके हैं, इसलिए दोबारा एक बड़ी सभा कराने से खास लाभ नहीं दिख रहा था।
बाइक सफर बना आकर्षण
मुजफ्फरपुर में राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बाइक पर सवार होकर यात्रा का नेतृत्व किया। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा भी अपने भाई के साथ बाइक पर पीछे बैठी नजर आईं। रास्ते भर लोगों ने उनका स्वागत कर माहौल को जोशीला बना दिया।
यात्रा का उद्देश्य
यह अभियान चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में चलाया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि आयोग मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाकर लोगों के वोट देने का अधिकार खत्म कर रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बता रहे हैं।
किन रास्तों से गुजरी यात्रा
अब तक यह पदयात्रा गया, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा जिलों से होकर गुजरी है। आगे इसका कारवां सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, सारण और भोजपुर होते हुए पटना में समापन मार्च तक पहुंचेगा।
चुनावी संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह यात्रा विपक्ष के लिए बड़ा संदेश है। पटना में होने वाला मार्च महागठबंधन की एकजुटता और मतदाता अधिकारों की रक्षा के संकल्प को दिखाने वाला कदम होगा।
