बिहार बिजली के क्षेत्र में पहले ही आत्मनिर्भर राज्य बन चुका है। यहां शहर तो दूर गांवों में भी 22 से 24 घंटे तक लोगों की बिजली मिल रही है। बावजूद इसके बिहार में अब भी बिजली उत्पादन की नई नई इकाइयां लग रही हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुशल नीतियों की वजह से बिहार अब औद्योगिकीकरण की ओर कदम बढ़ा चुका है। स्वाभाविक है प्रदेश में नई-नई फैक्ट्रियां लगेंगी, तो आने वाले समय में बिजली की भी खपत बढ़ेगी। ऐसे में सरकार पहले से ही बिजली का पूरा प्रबंध कर रही है। इसके लिए राज्य भर में नए-नए बिजली संयंत्र, पॉवर ग्रिड स्टेशन और पॉवर ग्रिड सब स्टेशन लगाए जा रहे हैं। इसके अलावे कृषि के लिए भी किसानों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है। बड़ी बात ये कि किसानों को कृषि कार्य के लिए जो बिजली मिलती है, उस पर 92 फीसदी तक की छूट दी जा रही है। ऐसे में नीतीश सरकार किसानों को महज 55 पैसे प्रति यूनिट बिजली दे रही है।
बिहार में बिजली की निर्बाध आपूर्ति
पहली की सरकारों में गुल रहती थी बिजली
साल-2005 से पहले एक समय था जब बिहार में बिजली रहती ही नहीं थी। लेकिन आज नीतीश सरकार में बिहार सरप्लस बिजली उत्पादन वाला राज्य बन चुका है। ऐसे में बिहार आज न सिर्फ बिजली की अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है बल्कि अन्य राज्यों को बिजली सप्लाई करने की स्थिति में भी आ चुका है। वर्ष 2004 के आसपास बिहार एक ऐसा राज्य था जिसका अपना कोई पावर जेनेरेशन यूनिट नहीं था।बिहार को बिजली के मामले में केंद्रीय कोटे पर निर्भर रहना पड़ता था। मुश्किल से 700 से 750 मेगावाट तक बिजली की आपूर्ति होती थी, लेकिन श्री नीतीश कुमार के सत्ता में आते ही हालात बदलने लगे। और आज बिहार बिजली उत्पादन के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश सरकार ने बिजली की स्थिति को सुधारने के लिए सबसे पहले बरौनी और कांटी थर्मल पावर को पुनर्जीवित किया और जिसका बाद में विस्तारीकरण किया गया।
औरंगाबाद के नवीनगर में एनटीपीसी के सहयोग से 2000 मेगावाट तथा चौसा, कजरा एवं पीरपैंती में बिजली उत्पादन शुरू किया गया। अब नवीनगर पावर जेनरेटिंग कंपनी की तीसरी इकाई से बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। इस इकाई से उत्पादन शुरू होते ही बिहार को 680 मेगावाट बिजली मिलने लगी है। इस तरह अब नवीनगर की तीनों यूनिटों से 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन होने लगा है। बिजली के उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन और वितरण पर सरकार ने ध्यान दिया। साथ ही मोतिहारी, सुपौल. फुलवारीशरीफ, कल्याणपुर, हरनौत, मुंगेर एवं बारून में ट्रांसफॉर्मर रिपेयर वर्कशॉप का निर्माण कराया गया।विद्युत के संचरण और वितरण प्रणाली को ठीक करने के लिए 9200 करोड़ रुपये की राशि ऊर्जा विभाग को दी गई है।
बिहार में इनवेस्टमेंट को प्रोत्साहन
बिहार में उद्योग को बढ़ावा मिले, अधिक-से-अधिक इंडस्ट्रीज की स्थापना हो, कल-कारखाने लगें इसके लिए पहली प्राथमिकता कानून-व्यवस्था का सख्त होना था तो दूसरी प्राथमिकता बिजली की अधिक-से-अधिक उपलब्धता सुनिश्चित करना। नीतीश सरकार ने दोनों ही मोर्चे पर जबरदस्त काम किया। लॉ एंड ऑर्डर के दुरस्त होने के साथ ही बिहार में बड़े पैमाने पर कल-कारखाने लगने शुरू हुए। हाजीपुर में साइकिल कंपनी एटलस, हीरो और बिहटा में ब्रिटानिया जैसी बड़ी बिस्कुट कंपनी ने अपने कारखाने लगाए। इसके लिए सरकार ने ऐसे उद्योगों को बिजली में सब्सिडी देना शुरू किया। बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विभिन्न श्रेणी के औद्योगिक इकाइयों को 1.08 रुपये से लेकर 1.58 रुपये प्रति यूनिट अनुदान स्वीकृत किया। इस अनुदान से राज्य की सभी औद्योगिक इकाइयां लाभांवित होंगी। इससे बिहार मेंऔद्योगिकीकरण की गति तीव्र होगी।
एक समय कहा जाता था कि बिहार में जब घरेलू उपयोग के लिए बिजली उपलब्ध नहीं है तो फिर उद्योग के लिए बिजली की बात तो भूल ही जाइए लेकिन आज हालात बिल्कुल बदल गए हैं।आज बिजली की उपलब्धता इतनी अधिक है कि घरेलू उपयोग के साथ ही वह उद्योगों के लिए भी पर्याप्त है। एक समय वह भी था जब 2012-13 में बिहार में बिजली की प्रति व्यक्ति खपत 145 किलोवाट आवर थी जो 2019-20 में 332 किलोवाट आवर हो गई।
बिजली के मामले में बिहार सरप्लस राज्य बन गया है। बाजार से महंगी कीमतों पर बिजली खरीदकर आपूर्ति करनेवाला बिहार अब दूसरे राज्यों को बिजली बेचने की स्थिति में आ गया है। बिहार को अधिकतम 6500 मेगावाट पावर की जरूरत है जबकि मौजूदा समय में राज्य का केंद्रीय कोटा 7000 मेगावाट से अधिक हो गया है। इसमें एनटीपीसी समेत अन्य पावर प्लांट से मिलनेवाली बिजली शामिल है। अब बाढ़, बरौनी और नवीनगर बिजलीघर से भी बिजली आपूर्ति शुरू हो गई है, ऐसे में अतिरिक्त बिजली उत्पन्न होने की वजह से ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार सरप्लस पावर स्टेट बन गया है।
68 नवीन पावर सबस्टेशनों के निर्माण की स्वीकृति
उत्तर बिहार में बिजली की मांग में हो रही निरंतर वृद्धि, औद्योगिक विस्तार, कृषि क्षेत्र की उन्नति और घरेलू उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को देखते हुए उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने 68 नवीन पावर सबस्टेशनों के निर्माण की स्वीकृति दी है। इन पावर सबस्टेशनों की स्थापना से क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा और उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय, संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा प्राप्त होगी। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेडद्वारा 7.5 लाख से अधिक नये विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की संख्या में 1.25 लाख की वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र को और गति देने के लिए लगभग 9000 नये औद्योगिक कनेक्शन निर्गत किए गए हैं।
उद्योग की तरह ही नीतीश सरकार कृषि कार्य के लिए भी किसानों को सस्ते दर पर बिजली मुहैया करा रही है। बिहार की लगभग 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है इसलिए कृषि में व्यापक सुधार को लेकर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने स्वयं पहल की और किसानों की तरक्की के लिए कई तरह की योजनाएं चलाईं। इसमें प्रमुख है मुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध निश्चय योजना। इसके तहत बिहार सरकार ने किसानों को मुफ्त में बिजली कनेक्शन देने का फैसला लिया। इसके तहतअबतक 5 लाख 81 हजार किसानों को मुफ्त बिजली का कनेक्शन दिया जा चुका है। किसानों को 92 फीसदी अनुदान देकर मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट पर बिजली दी जा रही है। साथ ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कृषि कार्य के लिए अब 12 घंटे की जगह 16 घंटे बिजली उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। कृषि कार्य में सहूलियत के लिए बिहार में अब तक 2274 डेडीकेटेड कृषि फीडर बनाए जा चुके हैं। राज्य में कुल 3000 कृषि फीडरों की आवश्यकता है। इसे जून, 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन फीडरों के माध्यम से राज्य के किसानों को बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें कृषि कार्यों के लिए बिजली कनेक्शन मिल सके।
किसानों के हित में ऐसी व्यवस्था की गई है कि सिंचाई के लिए आसानी सेहर खेत तक पानी पहुंच जाए। कृषि कार्य के लिए बिजली की व्यवस्था से पंपिंग सेट पर किसानों की निर्भरता भी कम होगी और किसान काफी कम राशि में बिजली के माध्यम से खेतों में सिंचाई कर ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगे। खेती के लिए राज्य में अब तक 93 हजार 420 ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं लेकिन किसानों की सुविधा के लिए 31 हजार78 ट्रांसफॉर्मर और लगाने का फैसला लिया गया है। इसके तहत उत्तर बिहार में 18 हजार936 तो दक्षिण बिहार में 12 हजार141 ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे।
कृषि कार्य के लिए अलग से बिजली की व्यवस्था होने से किसानों को कृषि कार्य में काफी सहूलियत मिली है। अब उन्हें पटवन के लिए पारंपरिक स्त्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है साथ ही डीजल से चलनेवाले पंपिंग सेट के खर्चे से भी निजात मिल गई है। इस योजना से हर खेत में निर्बाध रूप से पानी पहुंच रहा है और फसलें लहलहा रही हैं जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
बिजली के क्षेत्र में एक और उपलब्धि बिहार के खाते में आई है। देश में सबसे ज्यादे बिजली से रौशन रहने वाले राज्यों में बिहार अव्वल आया है। ये दावा इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से जारी एक रिपोर्ट में किया गया है। वर्ष 2012 से वर्ष 2021 के लिए इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा तैयार किए गए नाइट टाइम लाइट एटलस के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर औसतन 45 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि बिहार में यह वृद्धि 474 फीसदी रही जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे आगे है। केरल में यह 119 फीसदी, मध्यप्रदेश में 66 फीसदी, उत्तरप्रदेश में 100 फीसदी एवं गुजरात में 58 फीसदी है। एन0आर0एस0सी0 के द्वारा नासा एवं नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेयर एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के आधार पर उपरोक्त सूचकांक को तैयार किया गया है। यह उपलब्धि बताती है कि बिहार ऊर्जा के क्षेत्र में कितनी प्रगति कर चुका है।
वर्ष 2005 से लेकर अबतक यानी वर्ष 2025 तक बिजली के क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2005 में केवल 17 लाख उपभोक्ता थे वहीं वर्ष 2025 में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ कर दो करोड़ 12 लाख हो गई है।पावर सब स्टेशनों की संख्या 2005 में 368 थीजो बढ़कर 1263 हो गई। वहीं पहले ग्रिड 45 थे, जिनकी संख्या बढ़कर 170 हो गई है।वर्ष 2005 में बिजली का नुकसान 59.2 प्रतिशत होता था, जो अब घटकर 15.5 फ़ीसदी रह गया है। बिजली की खपत की बात करें तो, पहले प्रति व्यक्ति खपत 70 यूनिट थी, जो बढ़कर 363 यूनिट हो गई है। वहीं कुल खपत की बात करें तो 2005 में 700 मेगावाट था, जो अब बढ़कर 8005 मेगावाट तक पहुंच गया है। बिजली सेवाओं के आधुनिकीकरण पर नीतीश सरकार 7305 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इससे बिहार में बिजली आपूर्ति की क्षमता 2 वर्षों में दुगुनी हो जाएगी। नये थर्मल पावर, पावर सबस्टेशन, ग्रिड और ट्रांसफॉर्मर आदि बनाने और बिजली संरक्षण प्रणाली को दुरुस्त करने के कारण वर्ष 2005 के मुकाबले 11 गुना अधिक बिजली की आपूर्ति हो रही है। आनेवाले 2 सालों में यह बढ़कर 16,632 मेगावाट की क्षमता का हो जाएगा।
