अनंत त्यागी
90 का दशक, बिहार में लालू यादव की सरकार...एक IAS की धर्मपत्नी, भतीजी और घर की नौकरानियों के दो साल तक लगातार यौन शौषण का आरोप और आरोपी को गंगा पुत्र, कोसीसूत साबित करने में लगा पूरा प्रशासन। आरोप लगा था मुख्यमंत्री के खासमखास विधायक के पुत्र पर।तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)
सिस्टम में हनक रखने वाले IAS, जनता को न्याय दिलाने वाले अधिकारी कैसे कुर्सी के सामने बौने, बेबस, लाचार और ‘पंगु’ साबित हो जाते हैं...कैसे ताकतवर लोग कमजोर साबित होते हैं...यह उसी की जिंदा दास्तान है...चंपा विश्वास कांड।
साल 1990 IAS बीबी विश्वास की शादी चंपा विश्वास से होती है...1982 बैच के अधिकारी बीबी की पोस्टिंग समाज कल्याण विभाग के सेक्रेट्री के पोस्ट पर होती है...घर दिया जाता है...पटना की बेली रोड पर। समाज कल्याण विभाग की अध्यक्ष, RJD की विधायक और CM की बेहद करीबी हेमलता यादव के ठीक बगल में। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, चारा घोटाला में सज़ायफ्ता और बिहार सरकार पर लगे जंगलराज के आरोपों के सबसे बड़े झंडाबरदार...लालू प्रसाद यादव…उस वक्त सूबे की कमान संभाल रहे थे. बिहार में 1990 से 2005 तक का वो दौर जब सरकार के चहेते नेताओं के सामने पूरा सिस्टम बेबस होता था.
IAS की पत्नी, नौकरानियों से रेप
बहरहाल, बकौल मीडिया रिपोर्टस, तारीख थी 7 सितंबर 1995... हेमलता यादव IAS बीबी विश्वास की पत्नी चंपा विश्वास को फोन करके घर बुलाती हैं। चंपा विश्वास जैसे ही हेमलता के घर पर पहुंचती हैं...उन्हें एक कमरे में ले जाकर बाहर से दरवाजा बंद कर दिया जाता है। कमरे के अंदर हेमलता यादव का बेटा पहले से मौजूद होता है। चंपा विश्वास से जबरन रेप किया जाता है औऱ ये सबस उस वक्त होता है जब आरजेडी नेता, लालू यादव की करीबी हेमलता यादव घर पर मौजूद होती हैं। रेप के बाद चंपा विश्वास को धमकी दी जाती है।वक्त बीतता जाता है...मृत्युंजय यादव बार-बार यही घिनौना जुर्म दोहराता है। उनकी भतीजी, घर की दो नौकरानी, इस वहशी हरकत का हर कोई शिकार होता है लेकिन धमकी के खौफ से जुबान पर खामोशी रहती है। दबंग नेता हेमलता का खौफ यहां तक कि अवैध संतान के डर से चंपा अपनी नसबंदी तक करा लेती हैं. दो साल बीत जाते हैं...चंपा हिम्मत कर 1997 में लिखित शिकायत दर्ज कराती हैं लेकिन सत्ता के अहम में दबा प्रशासन उफ्फ तक नहीं करता। पुलिस फाइल दबा देती है। तत्कालीन नेता विपक्ष और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी इस मुद्दे को उठाते हैं और प्रेस कॉफ्रेंस करते हैं। सूबे में इसके बाद हड़कंप सा मच जाता है।
राज्यपाल से शिकायत लेकिन हल नहीं
बीबी विश्वास अपनी धर्मपत्नी के साथ तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी के पास मदद के लिए गुहार लगाते हैं. राज्यपाल बिहार के गृह मंत्रालय को तुरंत सघन जांच के लिए लिखते हैं...DGP नियाज अहमद जांच करते हैं और मृत्युंजय यादव को क्लीन चिट देते हुए कहा जाता है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है। कई रिपोर्टस ये भी कहती हैं कि राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी ने इसकी सूचना केंद्र को भी दी थी .कोर्ट का फैसला और गुमनाम जिंदगी
आखिरकार राज्यपाल के दखल के बाद आखिरकार पाप का घड़ा फूटता है...मृत्युंजय गिरफ्तार होता है। हेमलता यादव को तीन साल की सजा होती है। पर निचली अदालत के फैसले को मृत्युंजय हाईकोर्ट में चुनौती देता है। जज साहब फैसले को पलट देते हैं...दलील दी जाती है कि दो साल तक रेप होता रहा तो IAS की पत्नी चुप रहीं...उन्होंने गर्भपात क्यों कराया..उन्होने नसबंदी क्यों कराई. मृत्यंजय के वकील इस पूरे प्रकरण को प्रेम प्रसंग का जामा पहनाते हैं।सरकार की ओर से भर्ती घोटाले में IAS अधिकारी का नाम उछाला जाता है. शासन-प्रशासन कोई पीड़ित परिवार के साथ खड़ा नहीं होता...नेता के परिवार को हर आरोपों से बरी कर दिया जाता है। वक्त बीतता है...बिहार से अलग होकर बने झारखंड में बीबी विश्वास आ जाते हैं...बाद में उनका निधन हो गया और कहा जाता है कि बिहार, झारखंड और दिल्ली से अलग चंपा विश्वास ने कोलकाता में गुमनाम जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया.
