ठनका के कहर से त्रस्त बिहार, तेज हवाओं ने बदला मौसम का मिजाज, अब तक 61 लोगों की मौत

बिहार का मौसम इन दिनों बेहद खराब चल रहा है। आकाशीय बिजली (ठनका) के कारण पिछले 10 दिनों में 61 लोगों की मौत की खबर है। ऐसे में पटना के आईएमडी निदेशक आशीष कुमार ने बताया कि प्री मॉनसून के दौरान बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में थंडरस्टॉर्म जैसी घटनाएं आम हैं। बिहार की अनोखी भौगोलिक स्थिति के कारण इस सीजन में व्रजपात, तेज हवाएं और चमकती बिजली का नजारा देखना एक सामान्‍य बात है।

बिहार में मौसम लगातार बिगड़ रहा है, खासकर पटना और दक्षिणी व पूर्वी क्षेत्रों में ठनका गिरने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। पिछले दस दिनों में ठनका की वजह से 61 लोगों की जान चली गई है, जिससे राज्य में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। IMD के निदेशक डॉ. आशीष कुमार के मुताब‍िक, प्री-मॉनसून के दौरान ऐसी घटनाएं सामान्य होती हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2020-21 में ठनका गिरने की 9 लाख घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2022-23 में बढ़कर 13 लाख से अधिक हो गईं। वहीं, 2022-23 में बिजली और आंधी-तूफान के कारण बिहार में 400 मौतें हुईं।

बिहार में बढ़ता ठनका का कहर, अब तक 61 लोगों की हुई मौत

बिहार में बढ़ता ठनका का कहर, अब तक 61 लोगों की हुई मौत

समतल जमीन, अधिक आर्द्रता और तापमान में उतार-चढ़ाव ठनका के खतरे को बढ़ाते हैं, खासकर किसानों के लिए जो खेतों में काम करते हैं। ठनका से बचने के लिए दोपहर 12 से 3 बजे और शाम 3 से 6 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतना जरूरी होता है।

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