Bihar: युवाओं को रोजगार नहीं! नीतीश के मंत्री 57 साल में बन गए प्रोफेसर, राजनीति छोड़ेंगे नहीं; पढ़ाएंगे पॉलिटिकल साइंस

बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी 57 साल की उम्र में सहायक प्रोफेसर पद के लिए चुने गए हैं। उनका चयन अनुसूचित जाति कोटे से हुआ है। हालांकि, वह राजनीति नहीं छोड़ेंगे और सहायक प्रोफेसर के तौर पर कोई वेतन भी नहीं लेंगे। इस चयन पर विपक्ष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बिहार के युवाओं को रोजगार नशीब नहीं है और मंत्री जी आरएसएस कोटे से प्रोफेसर बन गए।

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रमुख सहयोगी अशोक चौधरी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने उन्हें सहायक प्रोफेसर के पद के लिए चयनित किया है। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्य मंत्रिमंडल में वरिष्ठ मंत्री 57 वर्षीय चौधरी ने पांच साल पहले इस पद के लिए आवेदन किया था। उनका चयन अनुसूचित जाति कोटे से हुआ है। वह राजनीति नहीं छोड़ेंगे और सहायक प्रोफेसर के तौर पर कोई वेतन नहीं लेंगे।

assistant professor Ashok Chaudhary

नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी बने असि. प्रोफेसर

क्या बोले अशोक चौधरी

अशोक चौधरी ने फोन पर एक समाचार एजेंसी को बताया कि ‘‘मेरे पिता ने मुझे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि मैं राजनीति में एक मजबूत आधार तैयार करूं। यही वजह है कि राजनीति में आने से पहले मैंने मगध विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। उल्लेखनीय है कि अशोक चौधरी के दिवंगत पिता महावीर चौधरी 1980 के दशक में बिहार में कांग्रेस के शासन के दौरान मंत्री थे। उनकी बेटी शांभवी समस्तीपुर से लोक जनशक्ति (रामविलास) की मौजूदा सांसद हैं।

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