Bihar New FM Channel: बिहार के लोगों को अब घर बैठे अपनी भाषा में एफएम चैनल के जरिए जानकारियां उपलब्ध होंगी। कृषि, राज्य, जिले तहसील और आपके आसपास क्षेत्र से जुड़ी तमाम जानकारियों को आपके घर तक पहुंचाने के लिए अब निजी एफएम रेडियो का विस्तार होने जा रहा है। ये नई व्यवस्था राज्य के 18 जनपदों में लागू होगी। हालांकि, बिहार समेत देश के 234 नए शहरों/कस्बों में निजी रेडियो शुरू करने को मंजूरी दी गई है। सरकार के इस फैसले से उन इलाकों में रेडियो का सपना पूरा होगा, जहां अभी तक निजी एफएम रेडियो सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। खास बात यह है कि ये नए रेडियो चैनल स्थानीय भाषाओं में नई और स्थानीय सामाग्री भाषाओं नई और स्थानीय सामाग्री पेश करेंगे।
बिहार में एफएम चैनल
बिहार के नए शहरों में एफएम चैनलों की लिस्ट
| शहर का नाम | रेडियो चैनलों की संख्या |
| आरा | 3 |
| औरंगाबाद | 3 |
| बगहा | 3 |
| बेगूसराय | 3 |
| बेतिया | 3 |
| भागलपुर | 4 |
| बिहारशरीफ | 3 |
| छपरा | 3 |
| दरभंगा | 3 |
| गया | 4 |
| किशनगंज | 3 |
| मोतिहारी | 3 |
| मुंगेर | 3 |
| पूर्णिया | 4 |
| सहरसा | 3 |
| सासाराम | 3 |
| सीतामढ़ी | 3 |
| सीवान | 3 |
पटना में पहले से स्थापित टॉप-10 रेडियो स्टेशन
| रेडियो स्टेशन का नाम | भाषा/बोली | लॉन्चिंग वर्ष |
| विविध भारती | हिंदी | 1937 |
| रेड एफएम (93.5) | हिंदी, अंग्रेजी | 2006 |
| रेडियो मिर्ची (98.3) | हिंदी | 2005 |
| ज्ञान वाणी पटना एफएम (105.6) | हिंदी-अंग्रेजी | 1993 |
| रेडियो अड्डा | हिंदी | 2013 |
| आकाशवाणी एफएम रेनबो (101.3) | हिंदी-मैथिली | 1947 |
| आकाशवाणी पटना एफएम 101.6 | हिंदी-अंग्रेजी | 1950 |
| रेडियो सिटी (91.1) | हिंदी-अंग्रेजी | 2006 |
| बिग एफएम (95) | हिंदी | 2006 |
| बजाओ रेडियो | हिंदी, भोजपुरी, पंजाबी-हरियायाणवी, गुजराती, राजस्थानी, उत्तराखंडी, भक्ति | 2020 |
234 नये शहरों/कस्बों में खुलेंगे एफएम चैनल
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 234 नए शहरों और कस्बों में निजी एफएम रेडियो की शुरुआत से इन क्षेत्रों में एफएम रेडियो की अपूर्ण मांग पूरी होगी, जो अब भी निजी एफएम रेडियो प्रसारण से अछूते हैं और इससे मातृभाषा में नयी और स्थानीय सामग्री उपलब्ध होगी। इसमें रेखांकित किया गया कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, स्थानीय बोली और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल को बढ़ावा मिलेगा। स्वीकृत किये गये कई शहर आकांक्षी जिलों और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हैं। बयान में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में निजी एफएम रेडियो की स्थापना से वहां सरकारी पहुंच और मजबूत होगी।
