Patna News: मौर्यकालीन ऐतिहासिक धरोहर बराबर गुफाओं के रख-रखाव और वहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर पटना उच्च न्यायालय ने जहानाबाद जिला प्रशासन की कड़ी खिंचाई की है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन का रवैया केवल राजस्व वसूली तक सीमित है, जबकि ऐतिहासिक स्थल पर बुनियादी ढांचा विकसित करने के प्रति उसकी कोई जिम्मेदारी नजर नहीं आती। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राजीव रॉय ने 21 सितंबर को निश्चित रूप से जिला प्रशासन केवल राजस्व संग्रह में रुचि रखता है और वहां बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए उस धन को वापस लगाने की कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है।
बराबर गुफाओं की बदहाली पर पटना हाईकोर्ट की फटकार
क्या है मामला
अदालत ने यह आदेश राजबल्लभ प्रसाद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। प्रसाद ने वर्ष 2024-25 के बराबर श्रावणी मेले का 1.77 करोड़ रुपये में ठेका हासिल किया था। मेले के दौरान 12 अगस्त, 2024 को भगदड़ मचने के बाद इसे रोक दिया गया था, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। याचिकाकर्ता ने बाद में ठेके की पूरी राशि जमा कर दी थी। अंतिम भुगतान 19 अक्टूबर, 2024 को किया गया था, लेकिन इसके बाद उससे भुगतान में देरी के लिए 1.37 लाख रुपये का जुर्माना जमा करने को कहा गया।
अदालत ने कहा, ’’याचिकाकर्ता ने ठेके की पूरी राशि जमा कर दी। इसकी सराहना करने के बजाय अब उस पर जुर्माना लगा दिया गया है।’’ अदालत ने इस कार्रवाई को ’प्रतिवादियों की असंवेदनशीलता’ बताते हुए कहा कि यह तर्कसंगत नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा कि भगदड़ की घटना "जिला प्रशासन की ओर से कुप्रबंधन को स्पष्ट रूप से दर्शाती है" और कहा कि मेले से 1.77 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बावजूद स्थल पर स्थायी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने कहा, "यह दोहराया जाना चाहिए कि अदालतों ने बार-बार कहा है कि मेले से प्राप्त धनराशि को क्षेत्र के विकास में लगाया जाना चाहिए, ताकि स्थायी रूप से उचित स्वच्छता, सुरक्षा और बेहतर बुनियादी ढांचा सुनिश्चित किया जा सके।" अदालत ने कहा कि ये सुविधाएं साल 2024 में ही नहीं, बल्कि अब तक भी उपलब्ध नहीं हैं।
प्रशासन से मांगा हिसाब
अदालत ने जहानाबाद के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह पिछले पांच वर्षों के दौरान बराबर श्रावणी मेले से हुई आय और स्थायी विकास कार्यों पर खर्च की गई राशि का विवरण पेश करें। अदालत ने स्थायी शौचालय, पूरे वर्ष पेयजल की व्यवस्था, बैठने की सुविधा, वेंडिंग जोन, स्वच्छता और हरियाली से संबंधित योजना का खाका भी मांगा।
उच्च न्यायालय ने कहा, ’’श्रावणी मेले के एक महीने के दौरान अस्थायी शौचालय, पानी की सुविधा, स्वास्थ्य शिविर आदि लगाए जाने से संबंधित हलफनामे को सीधे खारिज कर दिया जाएगा।’’ अदालत ने स्थायी बुनियादी ढांचे के लिए योजना प्रस्तुत करने पर बल दिया। उच्च न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक से भी वर्ष 2024 जैसी भगदड़ की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी है। इसके अलावा वन, भवन निर्माण और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी स्थल के विकास को लेकर जवाब मांगा गया है।
बराबर गुफाएं तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की हैं और इनका निर्माण मौर्य काल में कराया गया था। अदालत ने इन्हें ’’महान ऐतिहासिक स्थल’’ बताते हुए इनकी स्थिति पर चिंता जताई।
मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी। अदालत ने जहानाबाद के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर उसे गुफाओं का दौरा करने और वहां की स्थिति तथा स्थायी सुविधाओं की जरूरतों पर प्रत्यक्ष रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
