22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में पहलगाव की बैसरन घाटी में हुई आतंकवादी घटना को कौन भूल सकता है। आतंकवादियों ने नाम पूछकर एक-एक करके 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पीओके में आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। अब उन्ही 25 बेकसूर पर्यटकों और एक स्थानीय निवासी की याद में पहलगाम में लिद्दर नदी के शांत किनारे पर एक स्मारक बनाई गई है।
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों की याद में बनी स्मारक
यह स्मारक आतंकवादी की निर्ममता और इंसानियत की अटूट मजबूती का प्रतीक है। इस आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय निवासी आदिल सुसैन को आतंकवादियों ने गोली मार दी थी। जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस स्मारक को बनाया है, जिसका निर्माण अगस्त में पूरा हुआ और इसे 30 अक्टूबर 2025 को आम लोगों के लिए खोला गया है।
स्मारक के उद्घाटन के अवसर पर भारतीय अल्पसंख्यक फाउंडेशन (IMF) के सदस्यों ने, राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संदू के नेतृत्व में, शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर बॉलीवुड अभिनेता मुकेश ऋषि भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह स्मारक न सिर्फ एक याद है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक भी है।
22 अप्रैल को बैसरन घाटी में हुए इस हमले की गिनती कश्मीर के हाल के वर्षों में सबसे घातक हमलों में होती है। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों ने वहां घूमने आए पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में निर्दोष यात्रियों के साथ ही स्थानीय पोनीवाला आदिल हुसैन भी मारा गया था।
हमले के कुछ हफ्तों बाद सुरक्षा बलों ने 'ऑपरेशन महादेव' चलाकर तीनों पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था। इसके साथ ही 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पीओके में लश्कर और जैश के 9 ठिकानों को नष्ट कर दिया गया। आज यह स्मारक न सिर्फ दुख की याद है, बल्कि साहस, एकता और न्याय की जीत का प्रतीक भी बन चुका है। इस स्मारक पर आने वाला हर व्यक्ति शहीदों के प्रति सम्मान दिखाते हुए, आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुट आवाज को महसूस करता है।
