Noida Sanitation Workers Strike News: देश के सबसे हाई-टेक शहरों में से एक नोएडा शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस और संविदा कर्मचारियों द्वारा बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल का आज चौथा दिन है। इस कार्य बहिष्कार के कारण आवासीय सेक्टरों, बहुमंजिला सोसायटियों और मुख्य सड़कों पर कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ जमा हो गए हैं। बारिश के मौसम में जगह-जगह जमा पानी और अब सड़कों पर सड़ रहे कूड़े के ढेरों से भयंकर दुर्गंध उठ रही है। इस बदहाली ने पूरे शहर को डंपिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सोसायटियों से लेकर सेक्टरों तक बुरा हाल (सांकेतिक चित्र)
आंकड़ों में समझें शहर का 'कूड़ा संकट'
नोएडा प्राधिकरण से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सफाई व्यवस्था का ढांचा ठप होने से शहर में भयावह स्थिति बन गई है। 5000 से अधिक कर्मचारी हड़ताल और कार्य बहिष्कार में शामिल हैं, जिससे शहर से रोजाना निकलने वाला कचरा 1000 मीट्रिक टन, जो पिछले तीन दिनों से प्रोसेस नहीं हो पा रहा है। सेक्टर 12, 22, 56, 82, 100 और 122 सहित दर्जनों सेक्टरों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान बंद है, जिससे लाखों निवासी परेशान हो रहे हैं।
साल में तीसरी बार ठप हुई व्यवस्था
स्थानीय निवासियों और RWA प्रतिनिधियों ने प्राधिकरण के ढचर ढुलमुल रवैये पर कड़ा रोष जताया है। नोएडा प्राधिकरण स्वच्छता के नाम पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से भी लगभग 16 गुना अधिक पैसा खर्च करता है। वर्ष 2023-24 के महज नौ महीनों में प्राधिकरण के जन स्वास्थ्य विभाग ने 182 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
इतने भारी-भरकम बजट के बावजूद, इस साल मार्च और जून के बाद सितंबर में यह तीसरी बार है जब कर्मचारियों ने हड़ताल की है। करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी आम करदाताओं को सड़ांध और बीमारियों के खौफ में जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
क्यों बार-बार हड़ताल पर जा रहे हैं सफाई कर्मचारी?
संविदा पर तैनात सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अनिश्चितता के माहौल में बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में वेतन वृद्धि है, जिसके तहत कहा जा रहा है कि वर्तमान वेतन को बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह किया जाए। दूसरी मांग ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने की है, मांग है कि 2.5% कमीशन लेने वाले ठेकेदारों को हटाकर सीधे नोएडा प्राधिकरण से जोड़ा जाए या पक्की नौकरी दी जाए। एक मांग यह भी है कि पुराने रुके हुए वेतन का तत्काल भुगतान हो और मृतक आश्रितों को नौकरी दी जाए। साथ कैशलेस हेल्थ कार्ड की भी मांग की जा रही है, और वो ये कि बिना किसी अतिरिक्त वेतन कटौती के पूर्ण स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिले।
अधिकारियों का रुख और आगे का रास्ता
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का तर्क है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से ठेके पर रखे गए हजारों कर्मचारियों को सीधे स्थायी करना संभव नहीं है। प्राधिकरण का दावा है कि वे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मानदेय दे रहे हैं और नया टेंडर आने पर मानदेय में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, आरडब्ल्यूए और शहरवासियों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन और यूनियनों की इस खींचतान का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते? यदि जल्द ही कोई मध्यस्थता कर हड़ताल खत्म नहीं कराई गई, तो बारिश के मौसम में शहर में गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी।
