Noida-Greater Noida Road Condition: इन दिनों में पूरे देश में मानसून का दौर जारी है। एक तरफ जहां उत्तर भारत के अन्य इलाकों में बारिश का विकराल रूप देखने को मिल रहा है वहीं नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 1 जून से 23 जुलाई तक सामान्य से 80 प्रतिशत कम बारिश हुई। गौतमबुद्ध नगर इस मानसून सीजन सबसे कम बारिश वाले जिलों में दूसरे नबंर पर रहा है। मौसम विभाग के दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 23 जुलाई तक जिले में मात्र 34 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य आंकड़े 174 मिलीमीटर से करीब 80 प्रतिशत कम है। हालांकि, गाजियाबाद में स्थिति थोड़ी बेहतर रही, जहां अब तक 78 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है।
लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि सामान्य से 80 प्रतिशत कम बारिश दर्ज किए जाने के बावजूद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगातार हो रही बरसात ने सड़कें बदहाल कर दी हैं। कई जगहों पर सड़कें धंस गई हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। हालत यह है कि राहगीरों को गड्ढों में से सड़कें खोजनी पड़ रही हैं। लगातार भीगने से सड़कों की परतें उखड़ने लगी हैं। बुधवार को महज दो घंटे की तेज बारिश ने हालात और भी खराब कर दिए। मुख्य मार्गों से लेकर कॉलोनियों की सड़कों तक गड्ढों और जलभराव की समस्या आम हो गई है, जिससे हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। इन हालातों के बावजूद भी प्राधिकरण ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है।
एफएनजी की हालत खराब
इन दिनों हालत यह कि फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) मार्ग की सर्विस रोड इस समय जगह-जगह गहरे गड्ढों से खराब हो चुकी है। सेक्टर-11 के पी ब्लॉक रोड, मदद डेयरी के सामने, सेक्टर-19 स्थित सनातन धर्म मंदिर के सामने, बरौला बाइपास रोड, सेक्टर-24 के ईएसआईसी अस्पताल के पास, भगेल, सलारपुर सहित कई इलाकों में सड़कें बुरी तरह टूट चुकी हैं। शहर के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में भी कई जगहों पर सड़कों की हालत खराब है।
लोगों को फिर मिला आश्वासन
इन इलाकों में भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और बारिश के चलते सड़कें जल्द टूट जाती हैं। फोनरवा के महासचिव के. के. जैन ने बताया कि शहर की कई प्रमुख सड़कें बेहद जर्जर हो गई हैं, जिससे लोगों को आवागमन में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जल्द मरम्मत की मांग की है। इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी महेंद्र प्रसाद ने आश्वासन दिया कि टूटी हुई सड़कों की मरम्मत जल्द शुरू कर दी जाएगी, ताकि लोगों को राहत मिल सके। अब देखना यह है कि क्या यह मरम्मत होगी और होगी तो कितने बेहतर ढंग से होगी।
सड़कों के धंसने से हादसे का खतरा
शहर के सेक्टर-36, चाई फाई और अन्य क्षेत्रों में मुख्य सड़कों के धंसने से हादसे का खतरा बढ़ गया है। वहीं, सेक्टरों की आंतरिक सड़कें भी कई स्थानों पर टूटकर जर्जर हो चुकी हैं। बीटा-1 और बीटा-2 सेक्टरों के सर्विस मार्गों की स्थिति भी बेहद खराब है। गड्ढों के कारण बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। सूरजपुर कासना मार्ग पर सूरजपुर घंटाघर चौक से एलजी और पी-थ्री गोलचक्कर से कासना नहर तक सड़क लंबे समय से क्षतिग्रस्त है और बारिश के चलते इसकी हालत और बिगड़ गई है।
प्राधिकरण कार्यालय के पास भी बड़े गड्ढे
हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के पास विप्रो गोलचक्कर के पास भी सर्विस रोड में बड़े गड्ढे बन गए हैं। अब बात यह है कि जब इन्हें अपने दफ्तर सामने के गड्ढे नहीं दिख रहे हैं तो इन्हें और कहीं के क्या ही दिखेंगे। इसी तरह, नॉलेज पार्क स्थित गुरुद्वारा के पास भी सड़क की हालत खराब है। सड़कों की इस खराब स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों ने प्राधिकरण अधिकारियों से कई बार शिकायतें की, लेकिन अब तक उनके कानों में जूं तक न रेंगी। मुख्य मार्गों के साथ-साथ आंतरिक सड़कों की बिगड़ती हालत से वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गड्ढों को पहचानना हो रहा मुश्किल
सेक्टर-19 के एक निवासी ने बताया कि बारिश के कारण शहर की कई सड़कें टूट गई हैं और कई जगहों पर धंस भी गई हैं। अब इन गड्ढों में पानी भरने से हालात और खराब हो गए हैं, जिससे खासतौर पर दोपहिया वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रात के समय इन जलभराव वाले गड्ढों को पहचान पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि हरी दर्शन चौकी की ओर आने-जाने वाले मार्गों पर कई जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं। इन गड्ढों की वजह से कई वाहन चालक फिसलकर गिर भी चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ है।
करोड़ों खर्च होने के बाद भी बिगड़ते हालात
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (परियोजना) ए.के सिंह ने कहा कि बारिश के बाद टूटी सड़कों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जहां-जहां गड्ढों की शिकायत मिल रही है, वहां तुरंत भराव का कार्य किया जा रहा है। सूरजपुर-कासना मार्ग की मरम्मत के लिए निविदा जारी कर दी गई है। वहीं, एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य हरेंद्र भाटी ने सवाल उठाते हुए कहा कि सड़कों के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, फिर भी कुछ ही महीनों में सड़कें उखड़ने लगती हैं। उन्होंने बताया कि शहर की कई सड़कों पर बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है।
कहां दर्ज हुई सबसे ज्यादा बारिश
बात अगर गौतमबुद्ध नगर में बारिश की करें तो 1 से 11 जून के बीच जिले में 88% कम बारिश हुई। इसके बाद 12 से 18 जून के बीच 61%, 19 से 25 जून के बीच 79%, और 26 जून से 2 जुलाई के बीच 81% कम वर्षा दर्ज की गई। गौर करने वाले की बात यह भी है कि जुलाई में भी हालात नहीं बदले। 3 से 9 जुलाई के दौरान 79%, 10 से 16 जुलाई के बीच 85% और 17 से 23 जुलाई के बीच 80% कम बारिश हुई। प्रदेश के सबसे कम बारिश पाने वाले जिलों की बात करें तो देवरिया में सामान्य से 94% कम वर्षा दर्ज की गई, गौतमबुद्ध नगर में 82%, कुशीनगर में 81%, मऊ में 69% और शामली में 68% कम बारिश हुई है। वहीं, सबसे अधिक वर्षा वाले जिलों में महोबा सबसे आगे रहा, जहां सामान्य से 172% अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बाद ललितपुर में 132%, हमीरपुर में 125%, एटा में 119% और बांदा में 114% अधिक वर्षा हुई।
