एक सपनों का शहर... इस शहर में आने वालों का एक सपना वो फिल्मी गाने 'एक बंगला बने न्यारा, रहे कुनबा जिसमें सारा...' जैसा नहीं था। बल्कि एक छोटा सा फ्लैट और उस फ्लैट से दफ्तर आने-जाने के लिए मेट्रो, बस जैसे सार्वजनिक वाहन का था। बिल्डर बड़े चालाक निकले... उन्होंने भी बंगले का सपना नहीं बेचा... बल्कि मेट्रो का ही सपना बेचा। आज 14 साल हो गए... कुछ बिल्डरों के तो प्रोजेक्ट ही अब तक लटके पड़े हैं, लेकिन जिन बिल्डरों ने फ्लैट हैंडओवर भी कर दिए, वहां रहने वाले ठगा सा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि नोएडा एक्सटेंशन (Greater Noida West) नाम से जिस आधुनिक सपनों के नगर को बसाया गया, वहां आज भी लोग मेट्रो के लिए हर रविवार सड़क पर खड़े होकर प्रदर्शन करते हैं। हां, रविवार को ही प्रदर्शन कर सकते हैं बेचारे... क्योंकि बाकी के छ: दिन तो रोजी-रोटी कमाने में बीत जाते हैं।
नोएडा एक्सटेंशन की समस्याएं
