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नोएडा में साइबर ठगी: लिंक भेजकर ऐप डाउनलोड करवाई, फिर आधे घंटे में खाते से उड़ाए 9.58 लाख

Noida Syber Crime: नोएडा में साइबर क्राइम का एक और मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने आईजीएल बिल जमा न होने का झांसा देखकर 30 मिनट में 9.58 लाख रुपये की ठगी की वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है।

Noida Crime News

नोएडा में साइबर ठगी

Noida News: उत्तर प्रदेश के नोएडा में साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साइबर जालसाजों ने ठगी का एक नया तरीका अपनाते हुए सेक्टर-50 निवासी सेवानिवृत्त (Retired) शिक्षक आदित्य कुमार को अपना शिकार बनाया। जालसाजों ने उन्हें IGL (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) का बिल जमा नहीं होने का झांसा दिया और तकनीकी मदद के बहाने एक लिंक भेजकर उनसे एक ऐप डाउनलोड करवाई।

इस जालसाजी के चलते बुजुर्ग शिक्षक अपने 9.58 लाख रुपये गंवा बैठे। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। यह घटना साइबर अपराधियों की बढ़ती सक्रियता और आम नागरिकों को शिकार बनाने के नए-नए तरीकों के बारे में बताती है। इन्हें रोकने लिए साइबर क्राइम और पुलिस की टीम एकजुटता से काम कर रही है।

कनेक्शन कट जाने का डर दिखाकर उड़ाए लाखों

जानकारी के अनुसार, यह पूरी वारदात 25 नवंबर की शाम को हुई। सेवानिवृत्त शिक्षक आदित्य कुमार के पास एक जालसाज ने IGL कर्मी बनकर फोन किया और दावा किया कि पिछले महीने के गैस बिल का भुगतान नहीं हुआ है। अगर तुरंत भुगतान नहीं किया गया तो दो घंटे में कनेक्शन काट दिया जाएगा। तकनीकी खराबी के कारण विभाग द्वारा पेमेंट न होने का झांसा देकर, आरोपी ने ऑनलाइन बिल जमा करने का आसान रास्ता सुझाया।

बुजुर्ग आदित्य कुमार जब समाधान पूछने लगे, तो जालसाज ने तुरंत उनके व्हाट्सएप पर एक संदिग्ध लिंक भेजकर एक ऐप डाउनलोड करवाई। ऐप डाउनलोड होते ही, जालसाज ने शिक्षक के मोबाइल का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया और उन्हें बातों में फंसाकर शाम 5:15 बजे से 5:45 बजे तक यानी मात्र आधे घंटे के भीतर छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन में आदित्य कुमार और उनकी पत्नी के बैंक खातों से कुल 9.58 लाख रुपये ट्रांसफर कर ठगी की वारदात को अंजाम दिया।

मामले की जांच में जुटी पुलिस

लाखों की ठगी करने के बाद जालसाज ने पीड़ित से संपर्क तोड़ लिया। एडीसीपी साइबर, शैव्या गोयल ने इस बात की पुष्टि की है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में साइबर थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला एक बार फिर से इंस्टैंट मैसेजिंग और थर्ड-पार्टी ऐप्स के माध्यम से होने वाले वित्तीय धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करता है, जहां जालसाज, बिल या सेवाओं को बंद करने का डर दिखाकर लोगों से गोपनीय जानकारी निकलवाते हैं। पुलिस अब तकनीकी निगरानी के माध्यम से आरोपियों की पहचान कर रही है और इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया गया है।

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varsha kushwaha
varsha kushwaha Author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग... और देखें

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