NIT Kurukshetra Suicide: हरियाणा के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) कुरुक्षेत्र में एक बार फिर मातम पसर गया है। गुरुवार दोपहर को गर्ल्स हॉस्टल के एक कमरे में बी.टेक सेकंड ईयर की छात्रा का शव फंदे से लटका मिलने के बाद पूरे कैंपस में हड़कंप मच गया। पिछले 60 दिनों के भीतर इस संस्थान में यह चौथी आत्महत्या है, जिसने सुरक्षा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रा की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्र (ANI)
विरोध में उतरे छात्र
छात्रा की मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतर आए और संस्थान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का आरोप है कि संस्थान में लगातार हो रही मौतों के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। पुलिस अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है, लेकिन छात्रों के आक्रोश को देखते हुए कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पुलिस और प्रशासन का बयान
KUK थाना प्रभारी विशाल कुमार ने बताया कि उन्हें छात्रा के सुसाइड करने की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सीन ऑफ क्राइम टीम और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को बुलाया। छात्रा बिहार की रहने वाली बताई जा रही है और उसके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। फिलहाल शव को एलएनजेपी (LNJP) सिविल अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया गया है। संस्थान के जनसंपर्क प्रभारी ज्ञान भूषण ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक आत्महत्या के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है।
60 दिन में 4 मौतें
NIT कुरुक्षेत्र में पिछले दो महीनों में आत्महत्याओं का यह चौथा मामला है। मरने वालों में तेलंगाना, नूंह (हरियाणा), सिरसा (हरियाणा) और अब बिहार की छात्रा शामिल है। इनमें से दो छात्रों की उम्र महज 19 साल और दो की 22 साल थी। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर देश के इस टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों पर किस बात का इतना दबाव है।
प्रशासन के दावे बनाम हकीकत
पिछली घटनाओं के बाद NIT प्रशासन ने छात्र सहायता तंत्र को मजबूत करने और फैकल्टी-स्टूडेंट संवाद बढ़ाने के दावे किए थे। शिक्षकों को निर्देश दिए गए थे कि वे छात्रों की समस्याओं को समझें और उन्हें हल करें, लेकिन इस ताजा घटना ने इन सभी दावों की पोल खोल दी है। कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है और छात्र अब ठोस सुधारों की मांग पर अड़े हैं।
