भोपाल की छोटी झील पर NGT का शिकंजा, अवैध निर्माण और सीवेज पर 4 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

​झील में सीधे मिल रहे गंदे पानी को रोकने के लिए नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए गए हैं। निगम ने बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत नालों के डायवर्जन का काम चल रहा है, जिसकी प्रगति रिपोर्ट भी चार सप्ताह में मांगी गई है।

भोपाल : भोज वेटलैंड के तहत आने वाली भोपाल की प्रसिद्ध छोटी झील (लोअर लेक) को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने झील के आसपास हो रहे अवैध निर्माण, गंदे पानी (सीवेज) के बहाव और पेड़ों को नुकसान पहुँचाए जाने के मामलों में गंभीरता दिखाते हुए संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

NGT Cracks Down on Bhopal Lower Lake

भोपाल की छोटी झील पर NGT सख्त (फोटो-AI)

मामले की मुख्य बातें:

याचिका में प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण का मुद्दा उठाया गया। नगर निगम का तर्क था कि यह केवल मरम्मत का काम है, लेकिन एनजीटी ने साफ कर दिया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध या अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही 'वेटलैंड नियम, 2017 का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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