Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश में नवजात शिशुओं की तस्करी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने एलुरु जिले में इस गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने रविवार को इस संबंध में जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जांच संदिग्ध शिशु पंजीकरण दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल के बाद शुरू की गई थी। अनुमंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) डी. श्रवण कुमार ने कहा, "जांच के दौरान शिशुओं की अवैध बिक्री से जुड़े दो मामलों का पता चला, जिसके बाद हमने एलुरु जिले में नवजात शिशु तस्करी गिरोह को पकड़ने में सफलता पाई।"
आंध्र प्रदेश के एलुरु में बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश (सांकेतिक फोटो)
फर्जी कागजात भी किए गए तैयार
पुलिस के मुताबिक, पहला मामला मुदिनेपल्ली मंडल के एक दंपति से जुड़ा है, जिन्होंने कथित रूप से कई असफल आईवीएफ प्रयासों के बाद दिसंबर 2024 में लगभग तीन लाख रुपये देकर एक नवजात बच्ची खरीदी। इस घटना में छह लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें दंपति के साथ अन्य लोग भी शामिल हैं। दंपति ने गर्भवती होने का दिखावा किया और बिचौलियों के जरिए बच्ची को अपने घर लेकर जाकर उसे अपनी संतान साबित करने का प्रयास किया, जिसके लिए फर्जी कागजात भी तैयार किए गए।
30 हजार रुपये में बेचा गया नवजात
पूछताछ के दौरान नवजात शिशु की बिक्री से जुड़ा एक और मामला उजागर हुआ। पुलिस के अनुसार, 29 सितंबर 2024 को एलुरु के एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर एक नर्स के साथ सांठगांठ कर एक नवजात को करीब 30 हजार रुपये में बेच दिया गया था। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए हैं। वहीं, एलुरु के जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) सी. सूर्या चक्रवेणी ने बताया कि जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड की जांच के दौरान 24 सितंबर को एक प्राइवेट अस्पताल में जन्मे कुछ शिशुओं से संबंधित प्रविष्टियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद मामले की गहन जांच शुरू की गई।
मामले की जांच जारी
बाल संरक्षण अधिकारी ने आगे कहा, “ये घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि नवजात शिशुओं की अवैध खरीद-फरोख्त में एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है। इस मामले में विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।” चक्रवेणी ने यह भी बताया कि अब तक दो शिशुओं के बेचे जाने की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस नेटवर्क से जुड़े ऐसे और भी मामले सामने आ सकते हैं।
(इनपुट - भाषा)
