Delhi Dehradun Expressway (DDEC) बनकर तैयार हो चुका है और आगामी 14 अप्रैल को इसे आम जनता के लिए खोल भी दिया जाएगा। फिर दिल्ली से देहरादून तक आप फर्राटा मारते हुए सिर्फ ढाई घंटे में पहुंच जाएंगे और सिर्फ 1 घंटा और लगाकर मसूरी की वादियों में चाय की चुस्की ले रहे होंगे। ये तो बात हुई देहरादून और पहाड़ी की रानी मसूरी जाने की। अगर आप योग नगरी ऋषिकेश जाना चाहें तो क्या? हालांकि, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (DDEC) का एक स्पर हरिद्वार के लिए भी बनाया जा रहा है। लेकिन कभी आपके भी मन में आया होगा न कि कितना अच्छा होता अगर दिल्ली से मेट्रो में सवार होकर ऋषिकेश तक पहुंच पाते तो... अगर आपने कभी ऐसा सपना देखा है तो यकीन मानिए आपके उस सपने को साकार करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।
दिल्ली से ऋषिकेश तक नमो भारत चलाने की कोशिशें तेज (AI Image)
बता दें कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने नमो भारत RRTS कॉरिडोर (Namo Bharat) को मेरठ के मोदीपुरम से हरिद्वार तक बढ़ाने की मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश के लिए एक अलग मेट्रो कॉरिडोर विकसित करने पर भी जोर दिया।
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इन क्षेत्रों को मिल सकती है कनेक्टिविटी
वर्तमान में नमो भारत ट्रेन दिल्ली में सराय काले खां स्टेशन से मेरठ के मोदीपुरम तक संचालित हो रही है। प्रस्तावित विस्तार राष्ट्रीय राजमार्ग-58 के समानांतर हरिद्वार और ऋषिकेश तक जाएगा, जिससे दिल्ली से हिमालयी क्षेत्र तक सीधी तेज कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी।
यह कॉरिडोर मेरठ, खतौली, पुरकाजी, रुड़की, ज्वालापुर और ऋषिकेश जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। खासतौर पर इस कॉरिडोर के बन जान से IIT Roorkee वाले रुड़की में छात्र आवास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना सिर्फ परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में उभर सकती है। इससे दिल्ली से ऋषिकेश की यात्रा घटकर लगभग ढाई से तीन घंटे रह जाएगी। अच्छी बात ये होगी कि दिल्ली से नमो भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेन में सवार होकर योग नगरी की शांति तक की यह यात्रा बहुत ही आसानी से हो जाएगी। इससे पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आ सकती है।
परियोजना के लिए चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि, परियोजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। बता दें कि रुड़की से ऋषिकेश के बीच का हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क से होकर गुजरता है, जहां पर्यावरणीय मंजूरी एक बड़ी दिक्कत बन सकती है। इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण और पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण लागत भी परियोजना को जटिल बना सकते हैं।
अगर केंद्र, राज्य सरकारों और संबंधित एजेंसियों के बीच सहमति बनती है, तो इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
