फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के आवास पर गोलीबारी में शामिल आरोपियों का मकसद शहर में दहशत फैलाना था। मुंबई पुलिस ने विशेष मकोका अदालत इस बारे में बताया। साथ ही यह भी कहा कि पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत सख्त कानून लागू किया। सुनवाई के बाद विशेष मकोका अदालत ने घटना को "संगठित अपराध नेटवर्क का एक छोटा सा हिस्सा" बताते हुए पांचों आरोपियों को 17 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग मामले।
गौरतलब है कि 1 फरवरी को रात 12:45 बजे जुहू इलाके में रोहित शेट्टी की नौ मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर कम से कम पांच गोलियां चलाई गईं। एक गोली इमारत के अंदर स्थित जिम के शीशे पर लगी। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है।
ये लोग हुए हैं गिरफ्तार
एक अधिकारी ने बताया, "कुछ आरोपी पहले से ही गंभीर अपराधों में शामिल हैं। इसलिए अपराध शाखा ने एमसीओसीए (MCOCA) की धारा लगाई है। पुलिस ने मामले में अब तक आदित्य गायकी (19), सिद्धार्थ येनपुरे (20), समर्थ पोमाजी (18) और स्वप्निल सकट (23) और आसाराम फासले को गिरफ्तार किया है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का गुर्गा शुभम लोनकर इस मामले में वांछित आरोपियों में शामिल है। उसने कथित तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट में शेट्टी के आवास पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी ली है। शुभम लोनकर एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और बांद्रा में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के आवास पर गोलीबारी के मामले में भी वांछित है। आरोपियों को उनकी पिछली पुलिस हिरासत समाप्त होने के बाद विशेष मकोका अदालत के समक्ष पेश किया गया।
पुलिस ने मांगी थी इतने दिनों की रिमांड
पुलिस ने अदालत से आरोपियों की 15 दिनों की और रिमांड मांगते हुए कहा कि आरोपी शुभम लोनकर से जुड़े हुए हैं, जो फरार है, और उसके भाई प्रवीण लोनकर से भी जुड़े हुए हैं, जो एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में कथित भूमिका के लिए न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों से बरामद हथियारों में से एक हथियार प्रवीण लोनकर द्वारा सप्लाई किया गया था और गिरोह का मकसद मुंबई में दहशत फैलाना था।
वहीं, आरोपियों के वकील सचिन जाल्टे पाटिल और अजिंक्या मिर्गल ने नई रिमांड याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसमें कोई नए आधार नहीं हैं। केवल मकोका लागू करने से पुलिस को हिरासत में लेने का अधिकार नहीं मिल जाता है। प्रवीण लोनकर द्वारा हथियार मुहैया कराने के संबंध में, बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि वह डेढ़ साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने आरोपी को 17 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश देते हुए कहा कि संगठित अपराध गिरोह की कथित संलिप्तता को देखते हुए आगे की जांच "अपरिहार्य" है और जांच एजेंसी को सच्चाई का पता लगाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
