Ujjain Inspiring Story Dinesh Vairagi: कहते हैं कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, कुछ रिश्ते इंसानियत और फर्ज से सींचे जाते हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के जैथल गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने समाज में रूढ़िवादिता और पुरानी सोच पर करारी चोट की है। यहां एक ससुर ने अपनी विधवा बहू को केवल 'बहू' नहीं माना, बल्कि बेटे की मौत के बाद उसे अपनी सगी बेटी बनाकर एक नए जीवन की शुरुआत कराई। ससुर ने खुद पिता का हर फर्ज निभाते हुए धूमधाम से उसका कन्यादान किया और विदा किया।
ससुर हो तो ऐसा! बेटे की मौत के बाद खुद ढूंढा योग्य वर और पिता बनकर धूमधाम से किया बहू का कन्यादान
19 की उम्र में आई थी डोली, 5 साल बाद ही उजाड़ गया सिंदूर
यह कहानी शुरू होती है साल 2018 में, जब भोपाल की रहने वाली प्रियंका की शादी बड़े ही अरमानों के साथ उज्जैन के जैथल गांव के रहने वाले कपिल वैरागी से हुई थी। उस वक्त प्रियंका की उम्र महज 19 साल थी। शादी के बाद जिंदगी हंसी-खुशी कट रही थी, लेकिन कुछ ही सालों बाद इस हंसते-खेलते परिवार को एक गहरा सदमा लगा।
कैंसर लील गया खुशियां: कपिल को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया। करीब एक साल तक ससुर दिनेश वैरागी और पूरे परिवार ने कपिल का इलाज करवाया। उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
2023 में थम गई कपिल की सांसें: साल 2023 में कपिल जिंदगी की जंग हार गया और उसकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद प्रियंका की दुनिया पूरी तरह उजड़ चुकी थी। प्रियंका के माता-पिता और खुद प्रियंका के सामने सबसे बड़ा और डरावना सवाल यही था कि इतनी कम उम्र में अब उसकी आगे की जिंदगी कैसे कटेगी?
'बहू बनाकर लाया था, बेटी बनाकर विदा करूंगा'
बेटे के जाने का गम दिनेश वैरागी के लिए असहनीय था, पूरा परिवार टूट चुका था। लेकिन दिनेश ने अपनी आंखों के आंसुओं को पोंछते हुए एक बड़ा और साहसी फैसला लिया। उन्होंने अपनी बहू प्रियंका का हाथ थामा और संकल्प लिया- 'मैं इसे बहू बनाकर लाया था, लेकिन अब इसे अपनी बेटी बनाकर गरिमा के साथ विदा करूंगा।'
2 साल तक की योग्य वर की तलाश: दिनेश वैरागी खंडवा में सरकारी नौकरी करते हैं। उन्होंने प्रियंका की जिंदगी को दोबारा संवारने के लिए खुद योग्य वर की तलाश शुरू की। वे नहीं चाहते थे कि प्रियंका की उम्र और जिंदगी समाज के तानों या अकेलेपन में बीते।
विदिशा में मिला जीवनसाथी: दो साल की अथक कोशिशों के बाद विदिशा के अटारीखेड़ा निवासी गोविंद का रिश्ता सामने आया। दिनेश खुद गोविंद के घर गए, लड़के के परिवार और पृष्ठभूमि को अच्छे से देखा-परखा और संतुष्ट होने के बाद अपनी 'बेटी' प्रियंका का रिश्ता तय किया। गोविंद के परिवार ने भी इस पवित्र रिश्ते को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया।
रिसॉर्ट में गूंजी शहनाई, ससुर ने उठाया शादी का पूरा खर्च
हाल ही में भोपाल के एक आलीशान रिसॉर्ट में करीब 350 मेहमानों की मौजूदगी में प्रियंका और गोविंद का विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। इस विवाह की सबसे खास बात यह थी कि शादी का पूरा खर्च प्रियंका के ससुर दिनेश वैरागी ने ही उठाया।
ससुर ने किया कन्यादान: मंडप में जब कन्यादान का समय आया, तो दिनेश वैरागी ने खुद एक पिता के रूप में आगे बढ़कर प्रियंका का कन्यादान किया। यह नजारा देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
भावुक हुए प्रियंका के सगे पिता: इस अनोखी शादी में प्रियंका के सगे पिता भी शामिल हुए थे। अपनी बेटी की विदाई के समय वे बेहद भावुक हो गए और उन्होंने हाथ जोड़कर अपने समधी दिनेश वैरागी से कहा, 'मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे समधी मेरी बेटी को दुख के दलदल से निकालकर इतनी गरिमा और सम्मान के साथ एक नए घर के लिए विदा करेंगे।'
समाज के लिए एक नई मिसाल
आज के दौर में जहां अक्सर बहू-ससुर के रिश्तों में कड़वाहट या केवल कानूनी औपचारिकताओं की खबरें आती हैं, वहीं दिनेश वैरागी ने जो मिसाल पेश की है, वह देश और समाज के लिए एक बड़ी सीख है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर सोच सकारात्मक हो, तो किसी मासूम की थमी हुई जिंदगी को दोबारा खुशियों के रंगों से भरा जा सकता है। प्रियंका आज एक नए घर में कदम रख चुकी है, लेकिन उसके पास विदाई के आंसुओं के साथ-साथ अपने 'ससुर-पिता' के आशीर्वाद का वो अनमोल तोहफा है, जो ताउम्र उसकी ढाल बना रहेगा।
