मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में 'मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' के संचालक मण्डल की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश की जनता को सुगम और आधुनिक यात्रा अनुभव देने के लिए "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" योजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दी गई। बैठक में तय किया गया कि इस योजना के तहत बसों का संचालन सबसे पहले इंदौर संभाग से शुरू किया जाएगा। बैठक में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जहां बोर्ड के प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने इस पूरी योजना का विस्तृत प्रजेंटेशन दिया।
शुरू हो रही 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा', 7 शहरों से चलेंगी 5206 बसें
7 क्षेत्रों में बंटेगा मध्यप्रदेश, इंदौर बनेगा पहला लॉन्चिंग पैड
इस नई परिवहन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए संपूर्ण मध्यप्रदेश को 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों में बांटा गया है, जिनमें इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा शामिल हैं। योजना की शुरुआत इंदौर से होगी, जहां 'अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड' (AICTSL) अब पूरे इंदौर संभाग में बस संचालन के कार्यक्षेत्र को संभालेगी। इंदौर क्षेत्र के लिए कुल 250 मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिन पर 1,688 बसों का संचालन किया जाना प्रस्तावित है।
इंदौर को मिलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें, 4 राज्यों के लिए चलेंगी अंतर्राज्यीय बसें
इंदौर संभाग से शुरू होने वाले इस बस ऑपरेशन को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। इंदौर से मध्यप्रदेश के अन्य सभी जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाले 121 मार्गों पर कुल 608 बसें दौड़ेंगी। आम जनता की सुविधा के लिए शहर के साथ-साथ महत्वपूर्ण उप-नगरीय क्षेत्रों को जोड़ने के लिए 28 मार्ग तय किए गए हैं। इनमें कुल 784 बसें चलेंगी, जिसमें पीएम ई-बस सेवा के तहत आने वाली 150 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं। इन ई-बसों का संचालन जुलाई 2026 से प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश से सटे 4 पड़ोसी राज्यों- महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लिए अनुबंध के आधार पर कुल 101 मार्गों पर 276 अंतर्राज्यीय बसों का संचालन AICTSL द्वारा किया जाएगा।
पूरे प्रदेश में चलेंगी 5206 बसें; निजी संचालकों पर नहीं होगा असर
इंदौर की तर्ज पर ही बाकी बचे 6 क्षेत्रीय मुख्यालयों (भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और रीवा) में भी सहायक कंपनियों द्वारा बसें चलाई जाएंगी। पूरे प्रदेश के स्तर पर बात करें तो सभी 7 क्षेत्रों में कुल 1,164 मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिन पर 5,206 सरकारी बसें संचालित की जाएंगी। बैठक में निजी बस ऑपरेटरों को आश्वस्त करते हुए साफ किया गया कि इस सरकारी स्कीम से वर्तमान में चल रही निजी बसों के परमिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे पहले की तरह ही संचालित होती रहेंगी।
1,190 पदों पर होगी भर्ती, पुलिस और SAF के जवान संभालेंगे सुरक्षा
इस विशाल नेटवर्क को संभालने के लिए संचालक मण्डल ने 'सेवा भर्ती नियम-2026' को मंजूरी दी है। इसके तहत एक राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी और 7 क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में कुल 1,190 पद सृजित किए गए हैं, जिन्हें आगामी 4 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। बसों में यात्रियों की सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए पुलिस एवं विशेष सशस्त्र बल (SAF) के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति या संविदा पर लिया जाएगा। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में आईटी (IT), प्लानिंग, पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस डेवलपमेंट जैसे 7 अलग-अलग विभाग काम करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित कलेक्टर और नगरीय निकाय इन बस सेवाओं को आमजन के लिए पूरी तरह व्यवस्थित करें। वहीं मुख्य सचिव अनुराग जैन ने निर्देश दिए कि राज्य स्तरीय कंपनी की अधिकृत पूंजी 100 रुपये और पेड-अप कैपिटल 35 करोड़ रुपये रखी जाए।
