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मैं अकेली थी, दर्द में थी, पति दूसरी महिला के साथ; बच्चे को जन्म देती ही मां ने कर दिया...

महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने गर्भावस्था के दौरान उसे छोड़ दिया और बाद में दूसरी महिला के साथ भाग गया। उसने कहा जब मुझे उसे पति की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उसने मुझे छोड़ दिया। मैं अकेली थी, दर्द में थी और अजनबियों की मदद से ही जिंदा रह पाई।

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मां-बेबी (सांकेतिक फोटो-Istock)

गोरखपुर : जिले में एक अस्पताल में पति के विश्वासघात से नाराज एक महिला ने अपने नवजात बेटे को अपनाने से इनकार कर दिया और उसे स्तनपान कराने से भी मना कर दिया, जिससे अस्पताल के कर्मचारी असमंजस में पड़ गए। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि काफी समझाने के बाद महिला बच्चे को रखने के लिए राजी हुई। महिला ने कहा कि वह बच्चे को खुद पालेगी और उसे उसके पिता का नाम नहीं देगी।

दिल्ली में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली महिला ने बताया कि ट्रेन में सफर के दौरान उसे करीब चार घंटे तक प्रसव पीड़ा सहनी पड़ी, जिसके बाद राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की मदद से उसे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने गर्भावस्था के दौरान उसे छोड़ दिया और बाद में दूसरी महिला के साथ भाग गया।

महिला ने लगाए ये आरोप

महिला ने कहा कि जब मुझे उसकी (पति की) सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उसने मुझे छोड़ दिया। मैं अकेली थी, दर्द में थी और अजनबियों की मदद से ही जिंदा रह पाई। गुस्से व धोखे की भावना से व्याकुल होकर महिला ने शुरू में अपने नवजात शिशु को लेने से इनकार कर दिया और उसे स्तनपान कराने से भी मना कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा समझाने-बुझाने के बाद महिला बच्चे को अपने पास रखने के लिए राजी हो गई।

जिला अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक जय कुमार ने बताया, “शुरू में महिला को समझाना बहुत मुश्किल था। अब वह बच्चे को अपने पास रखने के लिए राजी हो गई है। बच्चे की सेहत में सुधार होते ही मां और बच्चे दोनों को छुट्टी दे दी जाएगी।” उन्होंने बताया कि तब तक, अस्पताल के कर्मचारी उनकी पूरी देखभाल कर रहे हैं और हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि मां और बच्चा दोनों फिलहाल निगरानी में हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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