Moradabad Aligarh Expressway: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक सड़क परियोजनाएं यहां के कनेक्टिविटी को और बेहतर बना रही हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, शामली-अंबाला एक्सप्रेसवे तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को रफ्तार दे ही रही हैं। साथ ही कई छोटे स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे को चौड़ा करके भी कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा रहा है। इसी तरह से मुरादाबाद से अलीगढ़ के बीच लगभग 150 किलोमीटर लंबे हाईस्पीड कॉरिडोर को 4 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे में अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए दोनों जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। मुरादाबाद में NHAI करीब 190 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करेगा, जबकि अलीगढ़ की गभाना और कोल तहसील के 45 गांव भी परियोजना के दायरे में आएंगे।
मुरादाबाद से अलीगढ़ का सफर होगा आसान और तेज
यह प्रस्तावित हाईवे मुरादाबाद से अमरोहा, संभल और बुलंदशहर होते हुए अलीगढ़ तक बनाया जाएगा। मुरादाबाद में प्रभावित क्षेत्र की जमीन खरीद-बिक्री और नई रजिस्ट्री पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई है। भूमि अधिग्रहण के बाद पात्र किसानों और अन्य भूमि मालिकों को उचित मुआवजा भी दिया जाएगा।
सिर्फ डेढ़ घंटे में होगा 3-4 घंटे का सफर
अभी मुरादाबाद से चंदौसी, बबराला और डिबाई होते हुए अलीगढ़ जाने में करीब 150 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। संकरी सड़कों, भारी वाहनों और ट्रैफिक दबाव के कारण यह यात्रा कई बार 3 से 4 घंटे तक खिंच जाती है।
नए फोर लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए तैयार किया जाएगा। परियोजना का काम पूरा होने पर सफर का समय लगभग डेढ़ से दो घंटे तक कम होने का अनुमान है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक इस सफर का समय लगभग 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
गांवों से नहीं मिलेगी सीधे एंट्री, इंटरचेंज से मिलेगा रास्ता
इस हाईवे की खास बात इसका एक्सेस-कंट्रोल्ड होना रहेगा। यानी किसी भी गांव या स्थानीय सड़क से वाहन सीधे हाईवे पर नहीं चढ़ पाएंगे। बल्कि इस हाईवे पर एंट्री और एग्जिट के लिए निर्धारित इंटरचेंज बनाए जाएंगे। इसके अलावा अन्य एक्सेस कंट्रोल हाईवे की तरह दो और तीन पहिया वाहनों को भी हाईवे पर एंट्री की अनुमति नहीं होगी। स्थानीय यातायात और भारी वाहनों के बीच टकराव कम करने के लिए परियोजना में अंडरपास, एलिवेटेड बाईपास और पैदल पुल जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं।
इस रूट को चौड़ा किए जाने का है प्रस्ताव
गंगा एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा प्रस्तावित हाईवे
मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे को बदायूं लिंक के जरिए गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी योजना है। इससे मुरादाबाद और अलीगढ़ से प्रयागराज सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक सड़क कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी। परियोजना के अलीगढ़-मुरादाबाद खंड पर एक बड़े पुल के निर्माण के लिए जून 2026 में 12.5 करोड़ रुपये का टेंडर जारी होने की जानकारी भी सामने आई है।
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आगरा-अलीगढ़ कनेक्टिविटी होगी मजबूत
इस कॉरिडोर का फायदा सिर्फ मुरादाबाद और अलीगढ़ तक ही सीमित नहीं रहेगा। आगरा-अलीगढ़ फोरलेन परियोजना के तहत 28 किलोमीटर के पहले पैकेज पर काम मार्च 2026 में शुरू हुआ है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे आगे चलकर मुरादाबाद से अलीगढ़ होते हुए आगरा तक चार लेन नेटवर्क मजबूत होगा।
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भूमि अधिग्रहण और सर्वे के बीच हरदुआगंज, पनेठी और गभाना जैसे इलाकों में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में भी रुचि बढ़ने की रिपोर्ट है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक आर्थिक असर निर्माण और संचालन शुरू होने के बाद ही साफ हो पाएगा।
