Monsoon 2026: मानसून के बीच देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज बेहद खराब बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते 100 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, जबकि केरल में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। पूर्वोत्तर में जहां अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी है, वहीं मेघालय में जुलाई का महीना सामान्य से काफी सूखा रहा। जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश के कारण जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने से अमरनाथ यात्रा भी प्रभावित हुई है। मौसम की इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
मानसून की मार से पहाड़ से मैदान तक हाहाकार!
हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 7 अगस्त येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 7 अगस्त तक भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, बारिश के कारण हुए भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से शनिवार शाम तक राज्य में 102 सड़कें यातायात के लिए बंद रहीं। इसके अलावा 28 पेयजल योजनाएं और 11 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए। सबसे अधिक 43 सड़कें मंडी जिले में बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 33, शिमला में 11, चंबा और कांगड़ा में पांच-पांच, सिरमौर में चार तथा ऊना में एक सड़क बंद है। राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। पिछले 24 घंटों में पंडोह में सर्वाधिक 45 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा शिमला में 36.3 मिमी, सराहन में 35.3 मिमी, स्लैपर में 31.6 मिमी, जोत में 30.8 मिमी, धर्मशाला में 26.3 मिमी और कुफरी में 25.5 मिमी वर्षा हुई। सुंदरनगर और मुरारी देवी में गरज के साथ बिजली चमकी। चंबा के भरमौर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि ऊना में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक से 31 जुलाई के बीच राज्य में औसतन 255.9 मिमी के मुकाबले 275.6 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, अगस्त में चंबा और लाहौल के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक, जबकि राज्य के शेष क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है।
केरल में मानसून का विकराल रूप
केरल के कई हिस्सों में शनिवार को भारी बारिश हुई, जिससे भूस्खलन हुआ, निचले इलाकों में पानी भर गया और नदियों व बांधों का जलस्तर बढ़ गया। इसके चलते अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बचाव और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान शुरू करना पड़ा। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी बयान के अनुसार, राज्य में बारिश से संबंधित घटनाओं में छह लोगों की मौत हुई है। बयान में कहा गया कि इडुक्की और कोट्टायम जिलों में हुए अलग-अलग भूस्खलनों में चार लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं, पुलिस, तटरक्षक बल, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की मदद से छह लापता लोगों की तलाश जारी है। राज्यभर में 65 राहत शिविर खोले गए हैं, जहां 1,465 लोगों को आश्रय दिया गया है। IMD ने पथनमथिट्टा, कोट्टायम, इडुक्की, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों के लिए अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं एर्नाकुलम, त्रिशूर और पलक्कड़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था।
मेघालय में जुलाई रहा सूखा
वहीं दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले इलाकों में शामिल मेघालय में इस वर्ष जुलाई का महीना असामान्य रूप से सूखा रहा और साउथ वेस्ट खासी हिल्स को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में कम या काफी कम वर्षा दर्ज की गई। IMD के अनुसार, राज्य के 11 जिलों में से पांच में जुलाई के दौरान सामान्य से 50 से लेकर करीब 80 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। वहीं, साउथ वेस्ट खासी हिल्स एकमात्र जिला रहा, जहां सामान्य से 83 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, ईस्ट खासी हिल्स जिले में भी लगभग 50 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई। इसी जिले में सोहरा (पूर्व में चेरापूंजी) और मौसिनराम स्थित हैं। यह स्थिति मूसलाधार मानसूनी बारिश के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध ऐसे क्षेत्र में लंबे सूखे दौर की गंभीरता को दर्शाती है। सोहरा और मौसिनराम धरती के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में गिने जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, जिस जिले में आम तौर पर जुलाई में लगभग 2,796 मिलीमीटर बारिश होती है, वहां इस साल सिर्फ 1,403 मिमी. बारिश दर्ज की गई। वेस्ट जयंतिया हिल्स में बारिश में सबसे ज्यादा 78 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। इसके बाद वेस्ट गारो हिल्स का स्थान आता है, जहां सामान्य औसत 1,092 मिमी के मुकाबले सिर्फ 339 मिमी बारिश हुई, यानी 69 प्रतिशत की कमी रही।
अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश का अनुमान
इसके साथ ही रविवार से अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार, पापुम पारे जिले में कुछ स्थानों पर 24 घंटे के दौरान 12 से 20 सेंटीमीटर तक अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं, पश्चिम कामेंग, लेपा राडा, पूर्व सियांग और लोहित जिलों के कुछ इलाकों में छह से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश का अनुमान है। इसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विज्ञान केंद्र की जिला-वार चेतावनी के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में गरज के साथ छींटे पड़ने का अनुमान है। पापुम पारे, लोअर सियांग, लोअर दिबांग वैली, लोहित, अंजॉ और आसपास के कुछ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि राज्य के अधिकांश अन्य जिलों के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। सोमवार को राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में मौसम बेहतर होने की उम्मीद है, हालांकि कुछ जिलों में मौसम पर नजर रखी जाएगी। अंजॉ के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पापुम पारे, लोअर सियांग और लेपा राडा के कुछ हिस्सों में भी गरज के साथ छीटे पड़ने और तेज बारिश का अनुमान है। मंगलवार को प्रतिकूल मौसम की स्थिति में और कमी आने का अनुमान है। बुधवार को मौसम में और सुधार होने का अनुमान है। मानसून के कारण अब तक राज्य के 28 जिलों के 665 गांव प्रभावित हुए हैं।
बारिश के कारण जम्मू से अमरनाथ यात्रा स्थगित
लगातार बारिश के कारण 250 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के लगातार दूसरे दिन भी बंद रहने से शनिवार को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई। अधिकारियों के अनुसार, उधमपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग के लाढ़ा-समरोली मार्ग पर मरम्मत कार्य जारी होने के कारण जम्मू आधार शिविर से कश्मीर घाटी के लिएश्रद्धालुओं का कोई नया जत्था रवाना नहीं किया गया। कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले एकमात्र राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर शुक्रवार को अमरनाथ यात्रा के काफिले के गुजरने के तुरंत बाद दोनों ओर से यातायात रोक दिया गया था। पिछले सप्ताह हुई बारिश से सड़क को हुए नुकसान की मरम्मत के लिए यह कदम उठाया गया था। ताजा बारिश से सड़क कीचड़युक्त और बेहद फिसलन भरी हो गई है जिससे मरम्मत कार्य में बाधा आई है। रामबन और उधमपुर के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। इस बीच, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने जम्मू आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी को देखते हुए यात्रा पंजीकरण और टोकन वितरण केंद्रों को तवी रिवरफ्रंट से भगवती नगर आधार शिविर में स्थानांतरित कर दिया है। तवी रिवरफ्रंट को अमरनाथ यात्रियों के ऑफलाइन पंजीकरण, टोकन वितरण, ई-केवाईसी सत्यापन और आरएफआईडी जारी करने के लिए एक केंद्रीकृत बड़़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के कारण अब इन सभी सुविधाओं को भगवती नगर आधार शिविर में एकीकृत कर दिया गया है। तीन जुलाई को अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 4.5 लाख श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित प्राकृतिक हिम शिवलिंग वाली पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं। अमरनाथ यात्रा का समापन 28 अगस्त को होगा, जो इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन पड़ रहा है।
