जनता के दबाव में कब-कब झुकी मोदी सरकार? 2014 के बाद कितने मंत्रियों के इस्तीफे

तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम. जे. अकबर ने अक्टूबर 2018 में ’मी टू’ अभियान के दौरान तब इस्तीफा दे दिया था, जब कुछ महिलाओं ने उन पर संपादक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। अकबर ने इन आरोपों का खंडन किया था, लेकिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद को लेकर शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक ऐसा मामला नहीं है, जब 2014 में सत्ता में आने के बाद से नरेन्द्र मोदी सरकार को लगातार बने राजनीतिक या जनता के दबाव के आगे झुकना पड़ा हो। सरकार के पीछे हटने का पहला बड़ा मामला 2015 में सामने आया था, जब बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाने के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने की कोशिश की गई थी।

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मोदी के कार्यकाल में कितने मंत्रियों का इस्तीफा (फोटो-AI)

इस कदम का किसान संगठनों, विपक्षी दलों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई सहयोगी दलों ने व्यापक विरोध किया था। उनका तर्क था कि इन बदलावों से मौजूदा प्रावधान कमजोर हो जाएंगे और यह जनविरोधी कदम है। अंतत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घोषणा करनी पड़ी थी कि मौजूदा कानून में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा। इसके तीन साल बाद, जनता के दबाव के कारण किसी मंत्री के इस्तीफे का पहला बड़ा मामला सामने आया।

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