Meerut Bulldozer Action: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में अनधिकृत निर्माणों और आवासीय संपत्तियों के अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर उच्चतम न्यायालय ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया है कि वे मेरठ में चिह्नित किए गए 16,000 से अधिक अवैध निर्माणों को खाली कराकर सील करें और उन्हें ढहाने की कानूनी कार्रवाई शुरू करें।
मेरठ में चलेगा सुप्रीम कोर्ट का चाबुक! (फाइल फोटो)
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी. गुरुप्रसाद की स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद यह कड़ा आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर और उसके आसपास सैकड़ों अवैध आवासीय कॉलोनियां बस गई हैं, जो बेहद चिंताजनक है। प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में शहर को चार अलग-अलग जोन (A, B, C और D) में बांटा गया था।
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16 टीमों ने कुल 16,726 निर्माणों को पूरी तरह से अवैध और अनधिकृत
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, अकेले जोन-A में ही तैनात 16 टीमों ने कुल 16,726 निर्माणों को पूरी तरह से अवैध और अनधिकृत पाया है। इनमें से 12,907 आवासीय, 2,945 गैर-आवासीय (व्यावसायिक) और 874 मिश्रित निर्माण शामिल हैं। अदालत ने कहा कि जर्जर और अवैध निर्माणों के कारण निर्दोष लोगों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक विशेष न्यायिक आयोग का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी किसी अवैध इमारत के गिरने से किसी की जान जाती है, तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अदालत ने उल्देपुर में सील की गई 44 संपत्तियों में से बची हुई 24 इमारतों को भी जल्द से जल्द ढहाने के निर्देश दिए हैं (इनमें से 20 को पहले ही ढहाया जा चुका है)। इसके साथ ही जोन-B, Zone-C और Zone-D की विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा गया है।
इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए उच्चतम न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक विशेष न्यायिक आयोग का गठन किया है। यह आयोग जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) पांच वर्षों से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रहा और क्या अधिकारियों की मिलीभगत से ये अवैध कॉलोनियां पनपीं। आयोग इस फर्जीवाड़े में शामिल दोषी अधिकारियों की पहचान कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में तय की गई है।
