Mathura News: ब्रज क्षेत्र के नामी संत चंद्रशेखर, जिन्हें लोग 'फरसा वाले बाबा' के नाम से जानते थे, उनकी मृत्यु के बाद उपजे जनाक्रोश और हिंसा की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। एसपी क्राइम के नेतृत्व में बनी तीन सदस्यीय यह विशेष टीम बाबा की मौत की गुत्थी सुलझाने के साथ-साथ हाईवे पर हुए पथराव और आगजनी की कड़ियों को भी जोड़ेगी।
फरसा वाले बाबा के मौत मामले SIT गठित
बवाल में 'बाहरी ताकतों' का हाथ?
पुलिस की प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अधिकारियों को संदेह है कि बाबा की मौत के बाद नेशनल हाईवे पर जो हिंसा भड़की, उसमें स्थानीय लोगों से ज्यादा 'बाहरी उपद्रवियों' की भूमिका थी। वीडियो साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को शक है कि जब शांतिपूर्ण बातचीत चल रही थी, तभी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से आए कुछ अज्ञात युवकों ने भीड़ को उकसाया और छिपकर पथराव शुरू किया। इन संदिग्धों की धरपकड़ के लिए पुलिस की तीन टीमें पड़ोसी राज्यों के लिए रवाना कर दी गई हैं।
गोपनीय मीटिंग और बढ़ता राजनीतिक पारा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भाजपा के जिला व महानगर अध्यक्षों, विहिप (VHP) और अन्य हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ जिला प्रशासन की एक गोपनीय बैठक भी हुई है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पुलिस द्वारा खुद की तरफ से दर्ज की गई FIR और युवाओं की गिरफ्तारी को लेकर तीखे सवाल पूछे गए। हिंदूवादी संगठनों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है, जिसे थामने के लिए रणनीतिकार लगातार प्रयास कर रहे हैं।
तीन राज्यों में फैला है बाबा का प्रभाव
फरसा वाले बाबा की प्रसिद्धि केवल मथुरा तक सीमित नहीं थी; राजस्थान और हरियाणा के युवाओं में भी उनकी बड़ी मान्यता थी। यही कारण है कि उनकी मौत के बाद साधु-संतों और धर्माचार्यों के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवा भी सड़कों पर उतर आए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इस जनभावना का लाभ उठाकर किसी सुनियोजित साजिश के तहत हिंसा फैलाई गई।
