सावन में मद्महेश्वर जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी, जान जोखिम में डालकर हो रही यात्रा

रुद्रप्रयाग जिले में मद्महेश्वर यात्रा मार्ग पर मोरखंडा नदी का झूला पुल पिछले तीन साल से अधूरा पड़ा है। श्रद्धालु और ग्रामीण अस्थायी लकड़ी के पुल व ट्रॉली से नदी पार करते हैं, लेकिन बरसात में लकड़ी का पुल भी बह जाता है।

पंचकेदार में मद्महेश्वर का नंबर दूसरा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विश्व प्रसिद्ध द्वितीय केदार की यात्रा करते हैं। इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए मद्महेश्वर की यात्रा आस्था के साथ ही कठिन परीक्षा भी बनी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि धाम के प्रमुख आधार शिविर बनातोली में मोरखंडा नदी पर निर्माणाधीन झूला पुल पिछले तीन सालों से अधूरा पड़ा है। ऐसे में स्थानीय ग्रामणों के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं को भी लकड़ी के अस्थायी पुल और ट्रॉली की रस्सी के सहारे नदी पार करने को मजबूर होना पड़ता है।

बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही लकड़ी की अस्थायी पुलिया बह जाती है, जिसके बाद ट्रॉली ही आवाजाही का एकमात्र साधन बची रहती है। हर दिन लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर यहां से यात्रा करनी पड़ रही है और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका भी बनी रहती है।

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