मध्य प्रदेश सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कल यानी बुधवार 15 जुलाई को कहा कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार UCC विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब देश एक है तो अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून क्यों होने चाहिए। सभी नागरिकों के लिए कानून भी समान होना चाहिए।
इंदौर जिला अस्पताल के नए 300 बेड के भवन के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अगर रामचंद्र एक विवाह करता है तो रहीम से भी यही अपेक्षा होनी चाहिए। उनका कहना था कि कानून के सामने सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
UCC Bill पर ड्राफ्ट रिपोर्ट सरकार को सौंपी
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। सरकार ने इस रिपोर्ट को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए कानून विभाग के पास भेज दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में आदिवासी समुदायों को प्रस्तावित UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है।
शादी, तलाक सहित कई विषयों का किया अध्ययन
समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुताबिक समिति ने विभिन्न धर्मों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इसके अलावा राज्यभर से 10 लाख से ज्यादा लोगों के सुझाव भी लिए गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार UCC लागू करने के अपने संकल्प पर कायम है और इस दिशा में आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC के मुद्दे पर कांग्रेस की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के कारण समिति की बैठकों में हिस्सा नहीं लिया और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अपना पक्ष रखने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विषय को भी हिंदू-मुस्लिम नजरिए से देखती है, जबकि यह सभी नागरिकों के लिए समान कानून का विषय है।
भोजशाला विवाद पर क्या बोले सीएम मोहन यादव?
मुख्यमंत्री ने धार स्थित भोजशाला विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरी गंभीरता से पालन करेगी। अदालत जो भी निर्णय देगी, सरकार उसे स्वीकार करते हुए उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई करेगी।
मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल ऐसे समय पर सामने आई है, जब देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बहस लगातार जारी है। यदि मानसून सत्र में विधेयक पेश होता है तो यह उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने की दिशा में मध्य प्रदेश का बड़ा विधायी कदम माना जाएगा।
