उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य महिला आयोग ने सार्वजनिक परिवहन वाहनों के चालकों की पहचान स्पष्ट रूप से दिखाने की मांग की है। इस कदम का उद्देश्य महिला सुरक्षा को बढ़ावा देना और उन्हें भरोसेमंद यात्रा का अनुभव प्रदान करना है। इससे अपराध के बाद दोषियों की पहचान करने में भी आसानी होगी।
सांकेतिक फोटो
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान ने परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने मांग की है कि सभी ई-रिक्शा, ऑटो, टैक्सी, ओला-उबर और रैपिडो जैसे वाहनों के चालकों के लिए अपने नाम, मोबाइल नंबर और आधार नंबर को वाहन पर बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का अनुभव देने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।
छेड़छाड़-लूट जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अहम कदम
इस पहल का मकसद महिलाओं के साथ यात्रा के दौरान हो रही छेड़छाड़, अभद्रता और लूट जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है। महिला आयोग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें ई-रिक्शा और ऑटो चालक ऐसी वारदात के बाद फरार हो जाते हैं, जिससे पुलिस को आरोपियों को पकड़ने में मुश्किल होती है। लेकिन नई व्यवस्था के तहत ड्राइवरों को अपने वाहन पर अपनी पहचान प्रदर्शित करनी होगी। जिससे घटना के बाद आरोपी को पहचानने में आसानी हो सके।
1 मार्च 2025 को एक महिला कर्मी के साथ छेड़छाड़ और लूट की घटना हुई। वहीं 1 अक्टबूर 2023 को आरोपी ने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महिला आयोग ने यह सिफारिश की है। बबिता सिंह चौहान ने कहा कि यह समय है कि परिवहन व्यवस्था में महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और वाहन चालकों की जिम्मेदारी तय की जाए।
