पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में मंगलवार दोपहर करीब 12:07 बजे एक निजी निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक भरभराकर गिर गया। ब्रेस ब्रिज के पास हुई इस भयानक दुर्घटना में अब तक 9 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि तकरीबन डेढ़ दर्जन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस हादसे को लेकर राज्य की मौजूदा सुवेंदु अधिकारी सरकार ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार पर तीखा हमला बोला है। राज्य की शहरी विकास और नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट कर दिया है कि पिछली सरकार के गलत फैसलों और भ्रष्टाचार का खामियाजा मौजूदा सरकार नहीं भुगतेगी। हादसे की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पूरे कोलकाता नगर निगम (KMC) क्षेत्र में सभी प्रकार के निर्माणाधीन कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
कोलकाता में 31 जुलाई तक सभी कंस्ट्रक्शन्स पर रोक (स्क्रीनग्रैब: ANI)
31 जुलाई तक निर्माण कार्यों पर पूर्ण रोक
कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बुधवार को घटनास्थल का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए एक बड़े नीतिगत फैसले का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि कोलकाता में चल रहे सभी निर्माण कार्यों को तत्काल निलंबित किया जा रहा है। यह रोक 31 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगी, जब तक कि सभी इमारतों और ढांचों का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट (सुरक्षा जांच) पूरा नहीं हो जाता।
पॉल ने पिछली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि NDRF ने दो जगहों पर ड्रिल कर रास्ता बनाया है। एक जगह दो लोग अभी मलबे के नीचे जीवित हैं, जिन्हें हमने पेनकिलर और आवश्यक दवाएं पहुंचाई हैं। रास्ता बेहद संकरा होने के कारण हमें एक छोटी क्रेन की जरूरत पड़ रही है। अंदर अभी और कितने लोग फंसे हैं, यह पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन अनुमान के मुताबिक 45 से 55 लोग काम पर आए थे। हम साफ कर देना चाहते हैं कि पिछली ममता बनर्जी सरकार ने जो किया, उसकी कीमत हमारी सरकार नहीं चुकाएगी।"
सेना, NDRF और अन्य एजेंसियों ने संभाला मोर्चा
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में घायल हुए 20 लोगों में से 2 की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और वे इंटेंसिव कोरोनरी केयर यूनिट (ICCU) में भर्ती हैं, जबकि बाकी 18 घायल खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। हादसे के ठीक 30 मिनट के भीतर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, सिविल डिफेंस और कोलकाता नगर निगम (KMC) की टीमें संयुक्त रूप से युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
'यह पिछली सरकार के पापों का फल'
राज्य की एक अन्य मंत्री मौमिता बिस्वास मिश्रा ने भी इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल का 'पाप' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान बिना किसी ठोस योजना और बेहद खराब गुणवत्ता (Substandard Construction) के साथ बड़े-बड़े ढांचों को अनुमति दी गई, जिसका परिणाम आज पश्चिम बंगाल भुगत रहा है।
मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की तत्परता और प्रशासनिक सक्रियता के कारण ही समय रहते 24 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य के सभी पुराने व निर्माणाधीन पुलों और इमारतों की बारीकी से जांच की जाएगी, जिसके बाद ही आगे की स्थिति का सही आकलन हो सकेगा। फिलहाल, पुलिस ने निर्माण से जुड़े नक्शों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
