चंडीगढ़ : किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने पंजाब सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। मोर्चा ने कहा कि किसानों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर 14 सितंबर से पंजाब के मंत्रियों और नेताओं के आवासों के बाहर धरना दिया जाएगा। प्रमुख मांगों में किसानों और मजदूरों का कर्ज माफ करना तथा फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद शामिल है।
किसान मजदूर मोर्चा (फाइल फोटो)
इस संबंध में बुधवार को चंडीगढ़ में किसान मजदूर मोर्चा की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता किसान नेता जसविंदर सिंह लोंगोवाल और बलदेव सिंह जीरा ने की। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यदि पंजाब सरकार ने उनकी मांगों का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसान नेताओं ने बताया कि आंदोलन की स्थिति की समीक्षा के लिए 16 सितंबर को फिर बैठक की जाएगी। यदि तब तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो आगे के आंदोलन को और व्यापक करने पर फैसला लिया जाएगा। इस दौरान किसान नेता सरवन सिंह पंधेर, ओंकार सिंह और मनजीत सिंह राय समेत कई नेता मौजूद रहे।
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क्या हैं मांगें
KMM ने बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की MSP पर सरकारी खरीद की मांग की है। किसान नेताओं का आरोप है कि इन फसलों के उत्पादकों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा और उन्हें अपनी उपज कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मोर्चा ने किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने की भी मांग उठाई।
किसान संगठन ने आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। इसके अलावा पंजाब में बार-बार आने वाली बाढ़, भूजल स्तर में गिरावट और बढ़ते वायु एवं जल प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी नीति बनाने की मांग की गई।
मोर्चा ने पंजाब विधानसभा में Seed Bill 2025, मनरेगा के स्थान पर केंद्रीय सरकार द्वारा लाए गए कानून और Electricity Amendment Bill 2025 के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की मांग की। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग वाला प्रस्ताव विधानसभा में पारित करने की भी मांग की गई।
किसान नेताओं ने किसान-मजदूर आंदोलनों के दौरान पुलिस और रेलवे की ओर से दर्ज मामलों तथा पराली जलाने से जुड़े मामलों को रद्द करने की मांग की। KMM ने लैंड-पूलिंग नीति का भी विरोध किया और भारatmala परियोजना के लिए किसानों की जमीन के कथित जबरन अधिग्रहण को रोकने की मांग की है।
