कल यानी मंगलवार 24 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। इस फैसले के तहत केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने दक्षिण भारतीय राज्य केरल (Kerala) का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर केरलम (Keralam) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। दिखने में यह बदलाव भले ही बहुत बड़ा न लगे और लगे कि हिंदी में सिर्फ 'म' और अंग्रेजी मे 'M' अक्षर ही जोड़ा गया है। लेकिन इसके पीछे लगभग 2000 साल से भी ज्यादा पुराना इतिहास और सांस्कृतिक पहचान जुड़ी है। देश के अन्य हिस्सों और दुनिया के लिए भले ही राज्य का नाम केरल हो, लेकिन यहां के मलयालम भाषी लोगों के लिए यह हमेशा से ही केरलम था। क्योंकि वह पहले से ही राज्य के लिए केरलम नाम का इस्तेमाल करते रहे हैं।
केरलम नाम का इतिहास
एक राजवंश से मिला नाम
इतिहास के अनुसार केरल में एक राजवंश का राज था। यहां पर चेरा वंश का राज था और माना जाता है कि उनके क्षेत्र को चेरलम (Cheralam) कहा जाता था। चेरलम का अर्थ 'चेराओं की भूमि' से था। समय के साथ इसके उच्चारण में बदलाव आया और चेरलम से नाम धीरे-धीरे केरलम हो गया। केरलम नाम को लेकर यह पहला और सबसे प्रामाणिक सिद्धांत है। यही नहीं तीसरी शताब्दी ईशा पूर्व में अशोक के शिलालेखों में केरलपुत्र शब्द का उल्लेख मिलता है, जिसे आज भी इस नाम का सबसे प्राचीन सुबूत माना जाता है।
नारियल के पेड़ों का सिद्धांत
केरलम नाम की व्युत्पत्ति को लेकर एक दूसरा सिद्धांत भी है। इस सिद्धांत के अनुसार 'केरा' का अर्थ नारियल का पेड़ होता है और 'आलम' शब्द का अर्थ भूमि से है। इस तरह से केरलम शब्द का अर्थ 'नारियलों की भूमि'है। हालांकि, नारियल के पेड़ों वाली व्याख्या काफी लोकप्रिय है, लेकिन इतिहासकार इसे बाद की लोक कल्पना मानते हैं।
केरल आधिकारिक नाम कैसे बना?
केरल नाम का इतिहास अंग्रेजों से जुड़ा है। अंग्रेजों ने भारत के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा तो कर लिया, लेकिन उन्हें स्थानीय नामों के उच्चारण में दिक्कत आती थी। इसलिए उन्होंने मलयालम के शब्द केरलम को Kerala पुकारना शुरू कर दिया। अंग्रेजों ने केरलम को आधिकारिक दस्तावेजों में 'Kerala' बना दिया। आजादी के बाद जब 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम आया तो इसके तहत राज्य के गठन के समय संविधान की अनुसूची में केरल (Kerala) नाम ही रखा गया।
नाम वापस केरलम करने की मांग
हालांकि, मलयालम भाषी लोग पहले से ही केरलम शब्द का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन राज्य विधानसभा ने अगस्त 2023 और उसके बाद जून 2024 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके केंद्र से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलकर केरलम करने की मांग की। बड़ी बात तो ये है कि एक-दूसरे की धुर विरोधी पार्टियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन की अगुवाई वाली LDF सरकार, कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF और राज्य में भाजपा सभी इस नाम परिवर्तन का समर्थन कर रहे हैं।
केंद्रीय कैबिनेट से मिला समर्थन, अब आगे क्या
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राष्ट्रपति के माध्यम से यह एक विधेयक के रूप में राज्य विधानसभा की राय के लिए जाएगा। बाद में इसे संसद में पेश किया जाएगा। संसद से मंजूरी के बाद केरलम नाम सभी दस्तावेजों, मैप्स और सरकारी रिकॉर्ड्स में लागू हो जाएगा। इस पूरी कवायद के पीछे स्थानीय भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की व्यापक प्रवृत्ति है।
