Kedarnath Ropeway Journey: बाबा केदार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को बेहद कठिन पदयात्रा करनी पड़ती है। केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर की ट्रैकिंग होती है। श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाने के लिए सरकार ने रोपवे परियोजना को मंजूरी दे दी है। जिसकी जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साझा की है। केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि कैबिनेट ने सोनप्रयाग से केदारनाथ रोपवे परियोजना के लिए 4,081 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जिसकी लंबाई 12.9 किलोमीटर होगी। रोपवे के जरिए 9 घंटे की यात्रा मात्र 36 मिनट में पूरी होगी।
केदारनाथ यात्रा के लिए बनेगा रोपवे।
केदारनाथ में रोपवे बनने से क्या कुछ बदल जाएगा?
केदारनाथ की यात्रा में कठिन चढ़ाई से श्रद्धालुओं को आने वाले समय में बड़ी राहत मिलने जा रही है। विशेषकर बुजुर्ग, दिव्यांग व शारीरिक रूप से अक्षम यात्री बिना किसी परेशानी अपनी यात्रा आरामदायक पूरी कर सकेंगे। केंद्र सरकार ने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक के लिए केबल कार (रोप-वे) परियोजना को मंजूरी दे दी गई। सबसे पहले आपको ये बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से किसे सबसे अधिक फायदा पहुंचेगा।
- बुज़ुर्गों और दिव्यांग लोगों को इस प्रोजेक्ट से केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने में आसानी होगी।
- इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के समय की बचत होगी।
- हेलीकॉप्टर के बाद एक और विकल्प खुल जाएगा, जिससे श्रद्धालु अब केदारनाथ तक पहुंच पाएंगे।
अब आपको बताते हैं कि इससे क्या कुछ बदल जाएगा। केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए फिलहाल श्रद्धालुओं के पास मुख्य तीन विकल्प मौजूद हैं।
- पहला विकल्प- पैदल यात्रा
- दूसरा विकल्प- खच्चर की सवारी
- तीसरा विकल्प- हेलीकॉप्टर यात्रा
केदारनाथ मंदिर मार्ग।
पैदल यात्रा के बारे में जानिए
केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए जो श्रद्धालु पैदल यात्रा का विकल्प चुनते हैं। उन्हें सबसे पहले सोनप्रयाग तक पहुंचना होता है। सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन होता है। इसके लिए ऑनलाइन विकल्प भी मौजूद रहता है। सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी पर बने लोहा पुल को पार करने के बाद श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग से गौरीकुंड के लिए चार पहिया गाड़ी मिलती है। जिसका किराया अमूमन 50 से 60 रुपये प्रति व्यक्ति होता है। गौरीकुंड से केदारनाथ की ट्रैकिंग शुरू होती है। ये ट्रैकिंग आधिकारिक तौर पर तो 16 किलोमीटर है, हालांकि नए रास्ते (प्रलय के बाद बने मार्ग) से ये सफर और अधिक लंबा माना जाता है। आपको पैदल यात्रा से जुड़े पड़ाव के बारे में बताते हैं।
- गौरीकुंड से जंगल चट्टी का सफर करीब 4 किलोमीटर का होता है।
- जंगलचट्टा से भीम बलि का सफर करीब 3 किलोमीटर का होता है।
- भीम बलि से अगला पड़ाव लिनचोली भी करीब 4 किलोमीटर दूर है।
- लिनचोली से बेस कैंप का सफर करीब 4 किलोमीटर लंबा है।
- बेस कैंप से केदारनाथ मंदिर करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
केदारनाथ मंदिर मार्ग।
खच्चर की सवारी के बारे में जानिए
यदि कोई श्रद्धालु खच्चर की सवारी के विकल्प को चुनता है। तो गौरीकुंड से उपर चढ़ते ही खच्चर की बुकिंग काउंटर है। वहां तय शुल्क के आधार पर खच्चर की बुकिंग होती है। हालांकि यदि श्रद्धालु रास्ते में खच्चर की बुकिंग करते हैं, तो उनसे मनमानी रुपये की वसूली की जाती है। खच्चर की सवारी भी केदारनाथ मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले तक ही की जा सकती है।
हेलीकॉप्टर यात्रा के बारे में जानिए
केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए जो श्रद्धालु हेलीकॉप्टर यात्रा का विकल्प चुनते हैं। उनके पास ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प मौजूद होता है। केदारनाथ तक पहुंचने के लिए तीन केंद्र से हेलीकॉप्टर की बुकिंग होती है।
- पहला विकल्प गुप्तकाशी हेलीपैड है, जहां से सीधे केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर मिलते हैं। ये विकल्प सबसे महंगा है।
- दूसरा विकल्प फाटा हेलीपैड से केदारनाथ तक की यात्रा है। फाटा से केदारनाथ हेलीकॉप्टर यात्रा गुप्तकाशी के तुलना में थोड़ा सस्ता है।
- तीसरा विकल्प सिरसी हेलीपैड से केदारनाथ तक की यात्रा है। सिरसी से केदारनाथ तक की हेलीकॉप्टर यात्रा सबसे सस्ता विकल्प है।
बनारस और वैष्णो देवी के बाद अब केदारनाथ में रोपवे प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने मंजूदी दे दी है। इससे पहले वैष्णो देवी में रोपवे प्रोजक्ट के विरोध में स्थानीय दुकानदार, टट्टू, और पालकी वालों ने आंदोलन किया। केदारनाथ तक रोपवे की परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे किस तरह अमल में लाती है, कब काम शुरू होगा, कब तक पूरा होगा? इससे जुड़ी हर जानकारी आपको हम पहुंचाते रहेंगे।
