Kanpur Metro: जमीन के अंदर दौड़ी मेट्रो, भौकाल से करिए AC ट्रेन में सफर; बस से भी कम है किराया

Kanpur Metro: कानपुरवासियों का जल्द ही आईआईटी टू मोतीझील के आगे नयागंज तक मेट्रो ट्रेन में सफर करने का सपना पूरा होने वाला है। मेट्रो के अंडरग्राउंड सेशन के चार स्टेशन मेट्रो का ट्रायल रन किया गया है। आइये जानते हैं कि निर्माणाधीन ब्लू (Kanpur Blue Line Metro) और ऑरेंज लाइन रूटों (Kanpur Orange Line Metro Route) पर कितने स्टेशन हैं और यहां कब मेट्रो का संचालन किया जाएगा?

Kanpur Metro: कानपुर शहर जाम के झाम में फंसकर अपने दिन का अधिकतर समय सड़क पर खर्च कर रहा था। इसी समस्या के समाधान के लिए शहर को समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की अखिलेश यादव सरकार (Akhilesh Yadav) ने मेट्रो की सौगात दी थी। हालांकि, इसका उद्घाटन योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान हुआ। लेकिन, अभी शहर के उन क्षेत्रों तक मेट्रो नहीं पहुंच पाई है, जहां अक्सर जाम की स्थिति रहती है। हालांकि, इस परियोजना के दो रूटों पर तेजी से कार्य चल रहा है। मुख्य कानपुर शहर से दक्षिण कानपुर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित ऑरेंज और ब्लू लाइन प्रोजेक्ट को इसी साल कंपलीट करने की योजना। फिलहाल, ऑरेंज लाइन के कुछ हिस्से पर मेट्रो का संचालन 2021 से जारी है, लेकिन अब इसके विस्तारित हिस्से पर मेट्रो दौड़ाने का सफल प्रयास किया गया है। अब आईआईटी से मोतीझील तक के सफर को नयागंज तक पहुंचाने के लिए ट्रायल रन कर खामियों को परखा गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही आगे के चार स्टेशनों तक मेट्रो का परिचालन प्रारंभ किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कानपुर मेट्रो का विकास किन रूटों पर किया जा रहा है और आने वाले समय में लोग कहां से कहां तक सुगम यात्रा कर सकेंगे?

IIT Kanpur to Nayaganj Metro Trial

कानपुर मेट्रो

आईआईटी से नयागंज तक होगा सफर

कानपुरवासियों के लिए खुशखबरी है। अब जल्द नए रूट पर मेट्रो ट्रेन पर सफर करने का मौका मिलने वाला है। अभी आईआईटी कानपुर से मोतीझील के बीच एलिवेटेड रूट पर मेट्रो का संचालन किया जा रहा था। लेकिन, शुक्रवार को मेट्रो के अंडरग्राउंड सेशन (Underground Metro Station) के चार स्टेशन मेट्रो के बीच मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेट्रो को मोतीझील से चुन्नीगंज, नवीन मार्केट, बड़ा चौराहा और नयागंज स्टेशन तक सिर्फ 2 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर देखा गया। इस दौरान पटरियों के बीच गैपिंक, ट्रैक पर पॉवर सप्लाई, स्टेशन प्लेटफार्म गैप इत्यादि को बारीकी से परखा गया है।

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