पैसा फेंकिये ग्रेजुएट बन जाइये! रडार में आए फर्जी डिग्री-मार्कशीट बनाने वाले मास्टरमाइंड; कानपुर में 'सिंडिकेट' का भंडाफोड़

कानपुर पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का कई राज्यों में लगभग 500 एजेंट का नेटवर्क था और करीब 500 ग्राहक थे। आरोपियों से जुड़े बैंक खातों की शुरुआती जांच में लगभग 60 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है।

कानपुर पुलिस ने शुक्रवार को पूरे देश में फैले फर्जी डिग्री और अंकपत्र बनाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया। अधिकारी ने कहा कि यह रैकेट कथित तौर पर दो दर्जन से ज़्यादा राज्यों में चल रहा था तथा इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया एवं उनके पास से नकली दस्तावेज, नकदी और डिजिटल सबूत बरामद किए। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने ’पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह कार्रवाई विशेष जांच दल (एसआईटी) और फीलखाना पुलिस ने मिलकर की, उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि एक संगठित गिरोह विश्वविद्यालय के फर्जी दस्तावेज बनाने और बेचने का काम कर रहा है।

Kanpur fake degree racket

कानपुर में फर्जी डिग्री और अंकपत्र बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ - @kanpurnagarpol

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अमित कुमार सक्सेना (35) और गोपाल गुप्ता (38) के तौर पर हुई है, जबकि इस रैकेट के कथित मास्टरमाइंड उन्नाव के अखिलेश शुक्ला और उनके भाई निखिलेश अभी फरार हैं। पुलिस आयुक्त के अनुसार पुलिस ने 59 नकली दस्तावेज बरामद किए, जिनमें कई विश्वविद्यालयों द्वारा कथित तौर पर जारी अंक, ’माइग्रेशन सर्टिफिकेट’, ’प्रोविज़नल सर्टिफिकेट’ और डिग्रियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, चार एंड्रॉयड फोन और 4.53 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।

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