नौकरी के वादे से क्रॉस-बॉर्डर सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट तक : अहमदाबाद कोर्ट ने दो को ठहराया दोषी; क्या है पूरी कहानी

अभियोजन के मुताबिक, मोहम्मद फारूक बांग्लादेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाता था और उन्हें भारत में नौकरी व बेहतर जिंदगी का भरोसा देता था। पीड़ित मां ने जांच अधिकारियों को बताया कि गरीबी के कारण वह इस झांसे में आ गई।

अहमदाबाद : गरीब बांग्लादेशी परिवार को रोजगार दिलाने के वादे से शुरू हुई कहानी आखिरकार अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी, नाबालिगों के यौन शोषण और देह व्यापार के एक संगठित नेटवर्क तक पहुंची। करीब दो साल की जांच के बाद अहमदाबाद की स्पेशल POCSO कोर्ट ने इस मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए गुजरात के चर्चित मानव तस्करी मामलों में से एक का निपटारा किया है।

Ahemdabad

आरोपी सागर मिलन मंडल और बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद फारूक

31 जुलाई 2026 को अहमदाबाद की स्पेशल POCSO कोर्ट ने पश्चिम बंगाल मूल के और अहमदाबाद के वस्त्राल में रहने वाले सागर मिलन मंडल और बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद फारूक उर्फ हारुन मोहम्मद करीम मंडल को भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट और इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। यह फैसला अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की ओर से 21 अगस्त 2024 को दर्ज की गई FIR के करीब एक साल बाद आया। जांच टीम ने लगातार कार्रवाई करते हुए मामले को अंजाम तक पहुंचाया।

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