Rajasthan Reservation Protest : नौकरियों और उच्च शिक्षा में 12 प्रतिशत पृथक आरक्षण की मांग को लेकर माली समाज का आंदोलन मंगलवार को स्थगित कर दिया गया। ये आंदोलन भरतपुर में चल रहा था। इसकी आधिकारिक घोषणा फुले आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी ने भरतपुर में की। बता दें कि सैनी, माली, कुशवाहा, शाक्य और मौर्य समुदाय के लोग आरक्षण संबंधी अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए 11 दिन से अरौदा गांव के पास प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान इन लोगों ने जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को भी बंद कर रखा था।
राजस्थान में आरक्षण माली समाज का प्रदर्शन खत्म। (सांकेतिक फोटो)
समिति के संयोजक क्या बोले
मुरारी लाल सैनी ने कहा कि ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आयोग के साथ जो बैठक हुई उसमें यह सहमति बनी है कि हमने कहा था कि आप जल्द से जल्द सर्वे कराकर रिपोर्ट सरकार को पहुंचाएं, हमें सरकार से आरक्षण का फैसला करवाना है। उन्होंने जिला कलेक्टरों को रिपोर्ट भेजने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। आगे वे बोले कि आगामी निर्णय तक आंदोलन स्थगित किया गया है। जरूरत पड़ी तो फिर आंदोलन किया जाएगा।
क्या मांग रखी गई थी
माली समुदाय के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति बताने और नौकरियों व उच्च शिक्षा में 12 प्रतिशत आरक्षण की अपनी मांग को लेकर सोमवार को ओबीसी आयोग से जयपुर में वार्ता की थी। सैनी, माली, कुशवाहा, शाक्य और मौर्य माली समुदाय के हैं। वे वर्तमान में ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत हैं लेकिन अलग से 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। सबसे खास बात तो ये है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी माली समुदाय से हैं। वहीं, इस समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पिछले दिनों मुलाकात की थी। उस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें ओबीसी आयोग द्वारा सर्वेक्षण कराने का आश्वासन दिया था।
सचिन पायलट क्या बोले
सचिन पायलट ने बीते दिनों कहा था कि कुछ दिनों से आरक्षण की मांग को लेकर सैनी, माली, कुशवाह, शाक्य एवं मौर्य समाज के लोग संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह करते हुए कहा था कि इन समाजों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के हित को देखते हुए इस मामले का जल्द से जल्द संतोषजनक हल निकालने की जरूरत है। हालांकि इस दौरान संवैधानिक व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
(भाषा इनपुट के साथ)
