भारतीय रेलवे ने कन्फर्म टिकटों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से वेटिंग टिकटों की सीमा तय कर दी है। अब किसी भी ट्रेन में कुल सीटों का केवल 25% ही वेटिंग टिकट के रूप में जारी किया जाएगा। यह निर्देश रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (पीएम) शिवेंद्र शुक्ला द्वारा जारी किया गया है और यह सभी श्रेणियों पर लागू होगा। नई व्यवस्था के तहत यात्री ऑनलाइन और काउंटर दोनों माध्यमों से टिकट बुक कर सकेंगे।
भारतीय रेलवे की नई पहल (सांकेतिक फोटो)
इसके अलावा, ट्रेन के फर्स्ट चार्ट बनने के चार घंटे बाद यदि सीट उपलब्ध होती है, तो करंट बुकिंग के जरिए यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिल सकेगा। रिजर्वेशन एक्सपर्ट और सीआरएस राजीव दास का कहना है कि जिन यात्रियों को ऑनलाइन टिकट बुक करने में कठिनाई होती है, वे काउंटर से टिकट प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि यह निर्णय यात्रियों को बेहतर सेवा देने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसके कुछ संभावित नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। विशेषकर स्पेशल ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ सकता है, क्योंकि रेलवे आमतौर पर लंबी वेटिंग लिस्ट को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेनें चलाने का निर्णय लेता है। वेटिंग टिकटों की संख्या सीमित होने से ऐसी मांग का आकलन कठिन हो सकता है। कुल मिलाकर, यह कदम यात्रियों को अधिक कन्फर्म टिकट सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक है, लेकिन इसके प्रभावों की समीक्षा और जरूरत पड़ने पर सुधार भी जरूरी होगा।
