Indore water contamination: इंदौर दूषित पानी मामले में अब एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। अब जो जानकारी सामने आई है, उसमें सीधे-सीधे तौर पर आधिकरियों की लापरवाही दिख रही है। अधिकारियों और सरकार को पाइप लाइन खराब होने की जानकारी पहले से थी, लेकिन सही समय पर कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला इस मुद्दे को लेकर नवंबर 2024 में ही सीएम मोहन यादव को चिट्ठी लिख चुके थे, लेकिन किसी ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया। नगर निगम के अधियारियों ने इस पत्र की अनदेखी की।
इंदौर में दूषित जल की जानकारी अधिकारियों को काफी पहले से थी
टेंडर आया लेकिन लटका रहा
इसके बाद जब स्थानीय पार्षद की ओर से दवाब डाला गया तो 30 जुलाई 2025 को पाइप बदलने के लिए टेंडर जारी किया गया, लेकिन काम नहीं हुआ। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि यह टेंडर समय पर खोला ही नहीं गया और लगभग 100 दिन बाद 29 दिसंबर शाम 4:30 बजे खोला गया। बताया जा रहा है कि निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया द्वारा भी टेंडर समय पर नहीं खोला गया, जिससे कार्य लंबित पड़ता चला गया।
7 कंपनियों की भागीदारी
यह टेंडर करीब 2.40 करोड़ रुपए का था। सात कंपनियों ने इसमें भाग लिया था, जिनमें से एक कंपनी का टेंडर रिजेक्ट हो गया। महत्वपूर्ण यह कि सभी कंपनियाँ 15 सितंबर तक टेंडर जमा कर चुकी थीं, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।
समय पर कार्रवाई होती तो टल सकती थी त्रासदी?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि अगर टेंडर समय पर खोला जाता और पाइपलाइन समय रहते बदल दी जाती, तो शायद आज की स्थिति नहीं बनती। 15 लोगों की मौतें और बड़ी संख्या में लोग बीमार होने की नौबत नहीं आती।
