हिमालय के नीचे तेज हलचल से Earthquake का बड़ा खतरा, भूकंप आया तो होगी भीषण तबाही

हिमालय के नीचे भारतीय प्लेट हर साल करीब पांच सेंटीमीटर तिब्बत की ओर खिसक रही है। वैज्ञानिक अध्ययन में प्लेट की गहराई, भूपर्पटी की मोटाई और हिमालय के भूकंपीय खतरे को समझा गया है।

बर्फ से लकदक हिमालय के पहाड़ देखने में कितने सुंदर लगते हैं न! वृहद हिमालय के अलावा कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल, भूटान, अरुणाचल प्रदेश तक पहाड़ों की खूबसूरती हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाती है। शहरों के शोर से दूर लोगों को पहाड़ों की शांति काफी पसंद आती है। हालांकि, ऊपर से शांत दिखाई देने वाले हिमालय की जमीन के नीचे भूगर्भीय हलचल काफी तेजी से चल रही है। यह हलचल इतनी तेज है कि भारतीय प्लेट हर साल लगभग पांच सेंटीमीटर की रफ्तार से तिब्बत की ओर बढ़ रही है। यूरेशियाई प्लेट से इस टकराव के चलते भारतीय प्लेट के मुड़ने और कुछ हिस्सों के टूटने की प्रक्रिया भी लगातार चल रही है। ऐसी भूगर्भीय गतिविधियों से धरती के भीतर तनाव और ऊर्जा जमा होती रहती है, जिसका असर भविष्य में हिमालय के अलग-अलग हिस्सों के भूकंप के गंभीर खतरे के रूप में देखने को मिल सकता है।

Himalaya Earthquake graphic

हिमालय में जमीन के नीचे बन रही भूकंप की भूमिका

वैसे भी हिमालय को दुनिया के सबसे एक्टिव भूकंपीय क्षेत्रों में गिना जाता है। जैसा कि हमने ऊपर बताया भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों की लगातार टक्कर इसका सबसे बड़ा कारण है। अब National Geophysical Research Institute (NGRI) के वैज्ञानिक रवि कुमार मुप्पिडी के अध्ययन में हिमालय-तिब्बत क्षेत्र के नीचे मौजूद क्रस्ट और लिथोस्फियर की संरचना को समझने के लिए ग्रैविटी, टोपोग्राफी, जिओइड (geoid) और भूकंपीय जानकारी (seismic information) को एक साथ मॉडल किया गया है। यह अध्ययन Springer की 2026 में प्रकाशित किताब Geophysics for Advancing Seismology के चैप्टर 3 में शामिल है।

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