अस्पतालों में आग से अब नहीं जाएगी जान! सरकार की नई गाइडलाइन लागू, हर अस्पताल में फायर ऑडिट और ट्रेनिंग जरूरी

अस्पतालों में होने वाले हादसों को रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने “ नेशनल गाइडलाइंस ऑन फायर एंड लाइफ सेफ्टी 2026” जारी की हैं। जिसके अनुसार अब फायर सेफ्टी कमेटी, ऑडिट, ट्रेनिंग और कोड रेड सिस्टम अनिवार्य होंगे।

देशभर में अस्पतालों में लगने वाली आग की घटनाओं ने कई बार बड़े हादसों को जन्म दिया है। इन हादसों में सबसे ज्यादा नुकसान उन मरीजों को होता है, जो खुद चल-फिर नहीं सकते। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने “नेशनल गाइडलाइंस ऑन फायर एंड लाइफ सेफ्टी इन हेल्थकेयर फैसिलिटीज 2026” जारी की हैं, जो अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली हैं। सरकार का साफ कहना है कि फायर सेफ्टी अब सिर्फ नियम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की लापरवाही सीधे जान के नुकसान में बदल सकती है।

Hospital Fire Safety Rules - AI

सांकेतिक फोटो

अस्पताल क्यों हैं ज्यादा खतरे में?

गाइडलाइन में बताया गया है कि अस्पतालों में आग लगने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज होते हैं, जिनकी मूवमेंट सीमित होती है। ऑक्सीजन और अन्य मेडिकल गैस का इस्तेमाल होता है। साथ ही जटिल इलेक्ट्रिकल सिस्टम और उपकरण होते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि भारत में ज्यादातर अस्पतालों में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट और खराब इलेक्ट्रिकल सिस्टम होते हैं।

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