देश के अधिकांश राज्यों में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर बाढ़ और नदियों के बढ़ते जलस्तर की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के कारण गंगा और सरयू नदियों का तांडव जारी है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत तथा दक्षिण भारत की कई नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश में मेघ गर्जन के साथ तेज वर्षा का अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं सिक्किम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, विदर्भ, तेलंगाना, कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, तटीय कर्नाटक और केरल में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। लगातार बारिश के बीच नदियों का बढ़ता जलस्तर, जलभराव, भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने जैसी घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बन रही हैं। कई इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
देश के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट
यूपी में कैसा रहेगा मौसम
उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। राज्य राहत आयुक्त कार्यालय ने मंगलवार को बताया कि बाढ़ से करीब 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र और 84,362 लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य राहत आयुक्त कार्यालय ने कहा कि हालांकि, प्रदेश में बाढ़ की स्थिति फिलहाल सामान्य और नियंत्रण में है। बाढ़ प्रभावित जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने बाढ़ की स्थिति और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने जिलाधिकारियों को प्रभावित लोगों को राहत शिविरों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा भोजन, चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 1,589 बाढ़ चौकियां और 1,263 बाढ़ आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। इनमें से 41 आश्रय स्थल फिलहाल उपयोग में हैं, जहां 1,045 लोग रह रहे हैं। अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 428 नौकाएं और मोटर बोट तथा 1,101 स्थानीय गोताखोर तैनात किए गए हैं। प्रभावित लोगों को 15,238 खाद्यान्न और 30,316 भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं। राज्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 16 टीम, जबकि विभिन्न जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) के जवान तैनात हैं।
कानपुर में बाढ़ का खतरा
गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण कानपुर के बाढ़ संभावित इलाकों के करीब 176 गांवों को बुधवार को सतर्क कर दिया गया। पुलिस और जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने के साथ बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर करीब 35 चौकियां स्थापित की गई हैं। लाल ने बताया कि 36 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम, एक पूर्ण बाढ़ राहत दल, करीब 100 प्रशिक्षित आपदा राहत गोताखोरों तथा होम गार्ड, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) और नागरिक पुलिस के जवानों को बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया है। लाल ने कहा कि हमने गंगा के किनारे बाढ़ संभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया है और बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की है। उन्होंने कहा, ’’नदी के किनारे और निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जबकि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए घाटों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
हिमाचल में कैसा रहेगा मौसम
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जारी भारी बारिश का दौर जारी है। हमीरपुर जिले के हथोल में एक सरकारी स्कूल में पास के बरसाती नाले (खड्ड) का पानी घुसने से दीवार गिर गई, जिसके बाद प्रशासन ने छात्रों को वहां से दूसरे स्थान पर भेज दिया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में शुक्कर खड्ड से पहलू को जोड़ने वाली सड़क के कुछ हिस्से बाढ़ के पानी के कारण पूरी तरह बह गए, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। सड़क पर बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन के कारण कई वाहन मलबे में फंस गए हैं। हमीरपुर के अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) अभिषेक गर्ग ने स्कूल की दीवार गिरने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।
अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश और उचित जल निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण परवाणू की सड़कों पर जलभराव हो गया है। कई वाहन पानी में फंस गए और डूबे हुए नजर आए। राज्य में भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और पेड़ गिरने की घटनाएं हुई हैं, जिसके चलते एक राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 167 सड़कें बंद हो गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, करीब 130 ट्रांसफार्मर और पेयजल आपूर्ति की 222 योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, मंडी जिले में सबसे अधिक 84 सड़कें अवरुद्ध हैं, जिनमें धरमपुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-3 भी शामिल है। कुल्लू में 35, सिरमौर में 12, शिमला, कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना में छह-छह, चंबा में चार, लाहौल-स्पीति में तीन तथा सोलन और बिलासपुर में दो-दो सड़कें बंद हैं।
बारिश के कारण बिजली आपूर्ति के ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। लाहौल-स्पीति में 68 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा हमीरपुर में 42, सोलन में 12 तथा कुल्लू और कांगड़ा में दो-दो ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। बारिश से पेयजल आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। हमीरपुर में 107, सिरमौर में 55, बिलासपुर में 28, कांगड़ा में 26, शिमला में पांच और सोलन में एक पेयजल योजना प्रभावित हुई है। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार शाम से पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। हमीरपुर जिले के सुजानपुर टीरा में सबसे अधिक 156.4 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके बाद नैना देवी में 138.6 मिमी, धर्मशाला में 130.4 मिमी, नादौन में 128.4 मिमी, कांगड़ा में 119.5 मिमी, भरवाईं में 118 मिमी, पालमपुर में 111 मिमी, नगरोटा सूरियां में 90.8 मिमी और हमीरपुर में 83.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने बताया कि 20 अगस्त को भी हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इसके लिए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सिरमौर, हमीरपुर और ऊना जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
दिल्ली-एनसीआर का मौसम
दिल्ली के कुछ हिस्सों में बुधवार को हुई हल्की बारिश से लोगों को उमस भरे मौसम से थोड़ी राहत मिली। इस दौरान शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री अधिक 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, सफदरजंग में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पालम में यह सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक 35.6 डिग्री सेल्सियस रहा। लोधी रोड और रिज में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह दोनों स्थानों पर सामान्य से क्रमश: दो डिग्री और 1.1 डिग्री अधिक रहा। आया नगर में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 0.9 डिग्री अधिक 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
मौसम विभाग ने दिल्ली में आमतौर पर बादल छाए रहने तथा कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। आईएमडी के केंद्रवार आंकड़ों के अनुसार, सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटे में पालम में 0.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, आया नगर में सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक 0.2 मिलीमीटर बारिश हुई। दिल्ली में सुबह आर्द्रता 78 प्रतिशत और शाम को 65 प्रतिशत दर्ज की गई। राजधानी में न्यूनतम तापमान सामान्य से 0.9 डिग्री अधिक 27.4 डिग्री सेल्सियस रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बुधवार शाम 110 दर्ज किया गया, जो ’मध्यम’ श्रेणी में आता है।
राजस्थान का मौसम
मौसम विभाग ने राजस्थान के कुछ हिस्सों में कल से फिर बारिश होने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार, 20 से 23 अगस्त के दौरान पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, जयपुर संभाग के कुछ भागों में हल्की मध्यम बारिश हो सकती है। साथ ही बाकी भागों में कमजोर बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इसी तरह बीकानेर संभाग के उत्तरी भागों व शेखावाटी क्षेत्र के कुछ भागों में 20 से 22 अगस्त के दौरान हल्की मध्यम बारिश होगी। बुधवार को सुबह तक, बीते चौबीस घंटे के दौरान राज्य के पश्चिमी भाग में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा तथा पूर्वी भाग के खेरथल तिजारा, बारां, कोटा, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ व सलुम्बर जिलों में कहीं कहीं पर हल्की बारिश हुई। सबसे अधिक 10 मिलीमीटर बारिश दानपुर (बाँसवाड़ा) में हुई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कानपुर बैराज के मापक केंद्र पर गंगा का जलस्तर ऊपरी धारा में 113.570 मीटर और निचली धारा में 113.420 मीटर है। वहां चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर है। एक अधिकारी ने बताया कि शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.180 मीटर था, जबकि वहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है।
उत्तराखंड में लैंडस्लाइड
उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में जारी बारिश के बीच पिथौरागढ़ जिले में धारचूला-तवाघाट मोटर मार्ग पर बुधवार को हुए भूस्खलन के कारण कूलागाड़ बेली पुल क्षतिग्रस्त हो गया। अधिकारियों के अनुसार, पहाड़ी से पत्थर और चट्टान गिरने के कारण पुल को नुकसान पहुंचा है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। सड़क संपर्क बहाल करने का काम शुरू कर दिया गया है। कूलागाड़ पुल धारचूला से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने धारचूला से व्यास और दारमा घाटियों की ओर आवाजाही फिलहाल रोक दी है। धारचूला के उप जिलाधिकारी आशीष जोशी ने कहा, ’’जब तक क्षतिग्रस्त पुल के बगल में वैकल्पिक रास्ता तैयार नहीं हो जाता, तब तक हमने लोगों से ऊंची घाटियों वाले गांवों से धारचूला की ओर आने-जाने से बचने का अनुरोध किया है।
उन्होंने बताया कि वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए बीआरओ ने सीमेंट ब्लॉक की मदद से रास्ता बनाने का काम शुरू कर दिया है। इससे जल्द ही आवागमन सुचारू होने की उम्मीद है। जोशी ने कहा कि बुधवार शाम तक पैदल आवाजाही शुरू हो जाएगी और उम्मीद है कि बृहस्पतिवार तक छोटी गाड़ियों का संचालन भी शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर नया पुल बनाने में पांच से 10 दिन का समय लग सकता है।
