Shiva Temple in Gurugram: इस शिव कुंड पर है भोलेनाथ की विशेष कृपा, स्नान करने मात्र से दूर हो जाते हैं चर्म रोग

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Feb 17, 2023, 03:38 PM IST

Shiva Temple in Gurugram: गुरुग्राम के सोहना में स्थित श्रीशिव कुंभ साख्मजती अघमर्षन कुंड की मान्‍याताएं दूर-दूर तक फैली हैं। महाशिवरात्रि पर इस शिवकुंड में स्‍नान करने और यहां के प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन करने वाले भक्‍तों की भारी भीड़ उमड़ती है। शिवकुंड में डुबकी लगाने के लिए शिवभक्‍तों को टोकन दिया जाएगा।

KEY HIGHLIGHTS
  • सोहना में स्थित श्रीशिव कुंभ साख्मजती अघमर्षन कुंड
  • शिव कुंड से निकलने वाले गर्म पानी में नहाने के लिए लगती है लाइन
  • महाशिवरात्रि पर यहां पर आयोजित होगा भव्‍य मेला


Shiva Temple in Gurugram: भारत देश को चमत्कारों और मान्‍यताओं का देश कहा जाता है। यहां पर कई ऐसे आश्चर्यचकित कर देने वाले चमत्कार देखने को मिल जाते हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए भी अबूझ पहली हैं। ऐसी ही एक चमत्‍कारों से भरी खास जगह गुरुग्राम में है। गुरुग्राम शहर से करीब 25 किमी. दूर अरावली की तलहटी में बसे सोहना में स्थित श्रीशिव कुंभ साख्मजती अघमर्षन कुंड की मान्‍याताएं दूर-दूर तक फैली हैं। महाशिवरात्रि पर यहां मौजूद प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन करने और यहां मौजूद गर्म पानी के कुंड में स्‍नान करने के लिए देश भर से भक्‍तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस मेले को लेकर जिला प्रशासन और मंदिर समिति की तरफ से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महाशिवरात्रि पर शिवकुंड में डुबकी लगाने के लिए शिवभक्‍तों को टोकन दिया जाएगा।

Famous Shiva Temple of Gurugram

शिव कुंड और प्राचीन शिवलिंग

यहां के शिवकुंड के साथ प्राचीन शिव मंदिर भी भक्‍तों के आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, विक्रमी संवत 1584 में यहां से गुजर रहे चतुर्भुज नामक एक व्यापारी ने अपना डेरा लगाया था। इस दौरान प्‍यास लगने पर पानी की खोज शुरू की, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी पानी नहीं मिला। इस दौरान थक हार और प्‍यास व्‍यापारी एक पेड़ के नीचे बैठकर भगवान शिव का गुणगान करने लगा। कुछ समय बाद ही उसका कुत्ता पानी से भीग हुआ उसके पास पहुंचा, यह देख वह अपने कुत्‍ते के साथ उस जगह पहुंचा। वहां जाकर उसने देखा कि एक छोटे से गड्डे से गर्म पानी लगातार निकल रहा है। इसके बाद सभी ने वहां पर पानी पिया। बाद में व्‍यापारी ने यहीं पर शिवलिंग स्‍थापित की मंदिर का निर्माण कराया।

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