केंद्र और UP सरकार के बीच 'Football' बनी ग्रेनो वेस्ट मेट्रो; नहीं मिली मंजूरी, फिर से बनेगी DPR

ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट एक बार फिर से अटक गया है, यहां के लोगों को फिर से निराशा हाथ लगी है। केंद्र सरकार ने डीपीआर लौटाते हुए योजना को नए सिरे से बनाने के निर्देश दिए हैं। अब इस रूट पर 5 स्टेशन बनाए जाने की बात कही जा रही है। इससे हजारों निवासियों को बेहतर परिवहन सुविधा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

क्या आपने कभी फुटबॉल खेला है? नहीं खेला है तो कम से कम देखा तो होगा ही। यह अनोखा खेल है। इसमें कभी केंद एक टीम के पाले में जाती है तो कभी अगले ही पल दूसरी टीम के पाले में। फुटबॉल में एक पूरी टीम, दूसरी टीम सें गेंद छीनकर अपने पाले से दूर, दूसरे पाले में ले जाना चाहती है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए जिस मेट्रो का सपना आज से 15-16 साल पहले देखा गया था, उसमें भी फुटबॉल ही जा रहा है। गेंद कभी राज्य सरकार यानी योगी सरकार के पाले में आती है तो कभी केंद्र सरकार के पाले में। इस फुटबॉल के गेम का बुरा प्रभाव अगर किसी को झेलना पड़ रहा है, तो वह ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग हैं। हजारों लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट में फ्लैट खरीदे। कई वर्ष बीत जाने के बावजूद भी उन्हें अपने फ्लैट नहीं मिले हैं। किसी को फ्लैट मिले भी तो सुविधाओं का भारी आभाव है। पेजयल की आपूर्ति अच्छी नहीं है, सड़कों पर भारी जाम रहता है और सोसाइटी में बिल्डरों की गुंडागर्दी की खबरें भी अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। सार्वजनिक परिवहन के नाम पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग थ्री-व्हीलर ऑटो के भरोसे हैं। न तो बस है न ही मेट्रो की सेवा। मेट्रो का सपना तो कई वर्षों से दिखाया जा रहा है, लेकिन यह सपना पूरा कब होगा, इसका कोई रोडमैप नजर नहीं आता। जब भी मेट्रो को लेकर कोई उम्मीद जगती है, उसके कुछ ही दिन बाद खामोशी से वह उम्मीद टूट भी जाती है। लोग एक बार फिर से ठगा हुआ महसूस करते हैं। हर बार ग्रेटर नोएडा वेस्ट को मेट्रो के नाम पर ठगा जाता है। एक बार फिर मेट्रो की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

​ग्रेटर नोएडा वेस्ट के मेट्रो का सपना फिर टूटा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के मेट्रो का सपना फिर टूटा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए मेट्रो एक सपना

आपने आज के अखबारों में ये खबर जरूर पढ़ी होगी कि नोएडा से ग्रेनो वेस्ट तक चलने वाली मेट्रो की योजना अब नए सिरे से तैयार की जाएगी। दरअसल ये वैसी पॉजिटिव खबर है नहीं, जैसी बनाकर आपके सामने परोसा गया है। इसके पीछे की असली खबर हम बताते हैं। करीब दो साल पहले ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक मेट्रो पहुंचाने के लिए एक DPR तैयार करके केंद्र सरकार को भेजी गई थी। केंद्र ने अब उस DPR से आपत्ति दर्शाते हुए उसे राज्य सरकार को वापस कर दिया है। इसका मतलब है कि जो कुछ लोग 2027 के विधानसभा चुनाव या 2029 के लोकसभा चुनाव तक ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो का काम शुरू होने या मेट्रो आने का सपना देख रहे थे, वह सपना, सपना ही रह जाएगा।

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