क्या आपने कभी फुटबॉल खेला है? नहीं खेला है तो कम से कम देखा तो होगा ही। यह अनोखा खेल है। इसमें कभी केंद एक टीम के पाले में जाती है तो कभी अगले ही पल दूसरी टीम के पाले में। फुटबॉल में एक पूरी टीम, दूसरी टीम सें गेंद छीनकर अपने पाले से दूर, दूसरे पाले में ले जाना चाहती है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए जिस मेट्रो का सपना आज से 15-16 साल पहले देखा गया था, उसमें भी फुटबॉल ही जा रहा है। गेंद कभी राज्य सरकार यानी योगी सरकार के पाले में आती है तो कभी केंद्र सरकार के पाले में। इस फुटबॉल के गेम का बुरा प्रभाव अगर किसी को झेलना पड़ रहा है, तो वह ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग हैं। हजारों लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट में फ्लैट खरीदे। कई वर्ष बीत जाने के बावजूद भी उन्हें अपने फ्लैट नहीं मिले हैं। किसी को फ्लैट मिले भी तो सुविधाओं का भारी आभाव है। पेजयल की आपूर्ति अच्छी नहीं है, सड़कों पर भारी जाम रहता है और सोसाइटी में बिल्डरों की गुंडागर्दी की खबरें भी अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। सार्वजनिक परिवहन के नाम पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग थ्री-व्हीलर ऑटो के भरोसे हैं। न तो बस है न ही मेट्रो की सेवा। मेट्रो का सपना तो कई वर्षों से दिखाया जा रहा है, लेकिन यह सपना पूरा कब होगा, इसका कोई रोडमैप नजर नहीं आता। जब भी मेट्रो को लेकर कोई उम्मीद जगती है, उसके कुछ ही दिन बाद खामोशी से वह उम्मीद टूट भी जाती है। लोग एक बार फिर से ठगा हुआ महसूस करते हैं। हर बार ग्रेटर नोएडा वेस्ट को मेट्रो के नाम पर ठगा जाता है। एक बार फिर मेट्रो की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के मेट्रो का सपना फिर टूटा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए मेट्रो एक सपना
आपने आज के अखबारों में ये खबर जरूर पढ़ी होगी कि नोएडा से ग्रेनो वेस्ट तक चलने वाली मेट्रो की योजना अब नए सिरे से तैयार की जाएगी। दरअसल ये वैसी पॉजिटिव खबर है नहीं, जैसी बनाकर आपके सामने परोसा गया है। इसके पीछे की असली खबर हम बताते हैं। करीब दो साल पहले ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक मेट्रो पहुंचाने के लिए एक DPR तैयार करके केंद्र सरकार को भेजी गई थी। केंद्र ने अब उस DPR से आपत्ति दर्शाते हुए उसे राज्य सरकार को वापस कर दिया है। इसका मतलब है कि जो कुछ लोग 2027 के विधानसभा चुनाव या 2029 के लोकसभा चुनाव तक ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो का काम शुरू होने या मेट्रो आने का सपना देख रहे थे, वह सपना, सपना ही रह जाएगा।
11 नहीं, अब 5 स्टेशन बनाए जाएंगे
दरअसल ग्रेटर नोएडा वेस्ट यानी नोएडा एक्सटेंशन के लिए नोएडा सेक्टर 51 से नॉलेज पार्क-5 तक प्रस्तावित है। केंद्र सरकार ने पुरानी डीपीआर पर आपत्ति जताते हुए उसे वापस कर दिया था। लगभग 2 साल पहले इसका रूट बदला गया, जिसकी डीपीआर मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजी गई थी। इस रूट पर 11 स्टेशन बनाए जाने थे। नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) अब नए सिरे से इस रूट के लिए DPR तैयार करेगा। दैनिक हिंदुस्तान अखबार ने NMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्ण कर्णेश का बयान छापा है, जिसमें उनका कहना है कि इस रूट की DPR केंद्र सरकार से आपत्ति के बाद नए सिरे से तैयार कराई जाएगी। इसको लेकर निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पहले इस रूट पर कुल 11 स्टेशन बनाए जाने थे, अब सिर्फ पांच स्टेशन बनाए जाएंगे, जो नोएडा में सेक्टर 61, सेक्टर 70, सेक्टर 122, सेक्टर 123 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में किसान चौक (चार मूर्ति चौक) के पास बनेंगे। इस पर एक हजार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान जताया गया है।
नमो भारत भी बनी विलेन
इस बीच दिल्ली और मेरठ के बीज देश की पहली RRTS नमो भारत ट्रेन बनी और इसका सफलतापूर्वक संचालन भी शुरू हो चुका है। फिर गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक नमो भारत ट्रेन चलाने की तैयारियां शुरू हो गई। अब नमो भारत के रूट के बीच में ग्रेटर नोएडा वेस्ट भी था। ऐसे में कहा जाने लगा कि एक ही रूट पर मेट्रो और नमो भारत चलाना मुश्किल है, जबकि पहले कहा जा रहा था कि दोनों एक ही ट्रैक का इस्तेमाल करेंगे। यहां नमो भारत विलेन बनी और नोएडा से ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक मेट्रो का रूट अटक गया।
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यहां आगे बढ़ेगा मेट्रो का काम
नोएडा सेक्टर 51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक मेट्रो के लिए भले ही अभी आपको लंबा इंतजार करने पड़ेगा, लेकिन दो रूटों पर कार्रवाई आगे बढ़ गई है। सेक्टर 142 से नोएडा बॉटेनिकल गार्डन तक और ग्रेनो डिपो से बोडाकी स्टेशन तक मेट्रो चलाने की तैयारियां चल रही हैं। दोनों ही रूट की DPR को केंद्र की तरफ से मंजूरी भी मिल चुकी है। अब जल्द ही इन दोनों लाइनों पर काम शुरू होगा। इन दोनों ही रूट पर जल्द टेंडर भी जारी होने की उम्मीद है। सेक्टर 142 से बॉटेनिकल गार्डन तक मेट्रो कॉरिडोर 11.56 किमी लंबा होगा और पूरी तरह से एलिवेटेड होगा। उम्मीद की जा रही है कि 2254 करोड़ से ज्यादा के इस प्रोजेक्ट का काम 4 साल में पूरा हो जाएगा। इस रूट पर कुल 8 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें बॉटनिकल गार्डन, नोएडा सेक्टर-44, नोएडा ऑफिस, नोएडा सेक्टर-97, नोएडा सेक्टर-105, नोएडा सेक्टर-108, सेक्टर-93, पंचशील बालक इंटर कॉलेज भी शामिल हैं। ग्रेटर नोएडा में डिपो स्टेशन से 2.6 किमी दूर बोड़ाकी स्टेशन तक भी एक्वा लाइन को बढ़ाया जाएगा। इस रूट पर करीब 416 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस रूट पर जूनपत गांव और बोड़ाकी दो नए स्टेशन बनेंगे।
