Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा के छपरौला गांव की गलियों में बुधवार की दोपहर रोज की तरह सामान्य थी। 5 साल का एक मासूम, जो अभी नर्सरी का छात्र था, अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। लेकिन उसे क्या पता था कि घर के ठीक पास मौजूद एक खुला और पानी से भरा प्लॉट उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा। खेलते-खेलते वह अचानक तीन फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरा।
3 फीट गहरे पानी में डूबने से मासूम की जान गई (सांकेतिक चित्र | iStock)
चीख-पुकार और नाकाम कोशिशें
जैसे ही बच्चा पानी में गिरा, साथ खेल रहे अन्य बच्चों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पड़ोसी और घर के अंदर काम कर रही मां बाहर दौड़ीं। स्थानीय लोगों ने रस्सी के सहारे बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को भी सूचित किया। आनन-फानन में मासूम को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
गांव की गंदगी और प्रशासन की अनदेखी
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि जिस प्लॉट में बच्चा गिरा, वहां लंबे समय से गांव का कचरा और पानी जमा हो रहा था। यह असुरक्षित इलाका सड़क के किनारे करीब एक किलोमीटर तक फैला हुआ है, लेकिन यहां न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम थे। हालांकि, दादरी के SDM अनुज नेहरा का कहना है कि यह पानी बुधवार को हुई बारिश के कारण जमा हुआ था, लेकिन प्लॉट के स्वामित्व और जलभराव के स्थायी कारणों पर फिलहाल चुप्पी साधी गई है।
3 महीने, 3 मौतें: आखिर कब जागेगा प्रशासन?
ग्रेटर नोएडा में पानी से भरे प्लॉट और गड्ढों के कारण जान जाने का यह तीसरा मामला है। बीते 15 फरवरी को दनकौर में एक 3 साल के मासूम की इसी तरह डूबने से मौत हुई। उसके पहले 18 जनवरी को सेक्टर 150 में एक 27 वर्षीय इंजीनियर की कार पानी से भरे प्लॉट में गिरने से उसकी जान चली गई। जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है, लेकिन क्या मुआवजे से उस मासूम की कमी पूरी हो पाएगी? गांव के लोग अब प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर इन खुले और खतरनाक प्लॉटों को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
