Weather Update: जब जब चाहा तूने रज के रुलाया, जब जब चाहा तूने खुल के हंसाया, जब जब चाहा तूने खुद में मिलाया, इक तू ही तू ही, तू ही तू ही...!" ये गाना तो आपने सुना ही होगा। हाल के दिनों में मौसम के हालात पर यह गाना बिल्कुल सटीक बैठता है। अभी 4 दिन पहले तक प्रचंड गर्मी से समूचे उत्तर भारत, पश्चिमी भारत और सेंट्रल इंडिया में लोगों का बुरा हाल था। Heatwave के कारण दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था और Warm Night की वजह से रात को नींद भी नहीं आ रही थी। फिर एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस आया और बादलों ने आसमान को घेर लिया। तेज हवा और बारिश ने सूरज की सारी गर्मी उतार दी और पारा धड़ाम हो गया। यानी मौसम ऐसा बना हुआ है कि जब चाहे गर्मी से तर-बतर कर देता है और जब चाहे राहत की बूंदें बरसा देता है।
पश्चिमी विक्षोभ की विदाई, अब होगा मानसून का स्वागत
इस हफ्ते मौसम में बड़ा बदलाव लाने वाला शक्तिशाली मौसम तंत्र अब धीरे-धीरे इस इलाके से बाहर निकल रहा है। Western Disturbance नाम की यह प्रणाली आज यानी सोमवार 1 जून की रात तक भारतीय उपमहाद्वीप से पूरी तरह विदाई ले लेगी। इस पश्चिमी विक्षोभ के जाने के साथ ही पूरे इलाके में मौसम एक नए ट्रांसजिशन के दौर में एंट्री लेगा।
क्या है वेस्टर्न डिस्टरबेंस
पिछले तीन-चार दिनों में इस प्रणाली के चलते उत्तर भारत के कई राज्यों में राहत भरी बारिश, तेज हवाएं और धूल भरी आंधियां लेकर आई थीं। इसका प्रमुख कारण यह है कि पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर क्षेत्र से उत्पन्न होने वाला एक निम्न दबाव क्षेत्र होता है, जो ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए हिमालयी क्षेत्र तक पहुंचता है। जैसे ही यह प्रणाली उत्तर भारत में एंट्री लेती है, यह गर्म और स्थिर हवा को ऊपर उठाती है, जिससे बादल बनते हैं और बारिश के हालात बनते हैं।
साइक्लोजेनेसिस के कारण हो रही बारिश
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वातावरण में अस्थिरता पैदा होती है, जिसे मौसम विज्ञान के अनुसार साइक्लोजेनेसिस कहा जाता है। इसी कारण पिछले कुछ दिनों में दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है। इससे तापमान में गिरावट से लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिली है।
आज भी बारिश और हवा के झोंके
अब चूंकि यह प्रणाली उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ रही है, इसका प्रभाव भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। हालांकि, वातावरण में बची हुई नमी सोमवार तक हल्की से मध्यम बारिश का कारण बन सकती है। खासकर मैदानी इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक तेज हवाओं के झोंके भी देखने को मिल सकते हैं।
मौसम पर IMD की कड़ी नजर
भारत मौसम विभाग (IMD) लगातार इस प्रणाली पर नजर बनाए हुए है। ताकि इसके अंतिम चरण में किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित मौसमीय गतिविधि से बचा जा सके। जानकारों का कहना है कि यह अंतिम बारिश की फुहारें मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए बहुत अधिक उपयोगी हैं, जिससे कृषि गतिविधियों को भी फायदा मिलता है।
अब मानसूनी हवाएं होंगी सक्रिय
वेस्टर्न डिस्टरबेंस के जाने के बाद अब सभी की नजरें दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति पर टिकी हैं। हालांकि, Monsoon के आगमन को लेकर अभी पूरी तरह से स्पष्ट स्थिति नहीं बनी है, लेकिन दीर्घकालिक मौसम पैटर्न संकेत देते हैं कि आने वाले हफ्तों में मानसूनी हवाएं सक्रिय होंगी।
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यह संक्रमण काल कृषि चक्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रबी फसल की कटाई के बाद और खरीफ फसल की बुवाई से पहले यह समय मिट्टी और वातावरण दोनों को संतुलित करने का काम करता है। जानकार सलाह दे रहे हैं कि लोग मौसम विभाग की आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें, ताकि आने वाले मौसम परिवर्तन के लिए बेहतर तैयारी की जा सके।
