नई दिल्ली: गोवा पुलिस ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल निगरानी को मजबूती देने के लिए दो अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल — “स्पॉट द स्कैम” और “रैडिकल कंटेंट एनालाइज़र” — लॉन्च किए हैं। ये दोनों टूल BITS पिलानी गोवा कैंपस के सहयोग से गोवा पुलिस हैकाथॉन 2024 के दौरान विकसित किए गए।
इन टूल्स का औपचारिक उद्घाटन गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने किया। इस मौके पर DGP श्री आलोक कुमार, BITS पिलानी गोवा कैंपस के निदेशक प्रो. सुमन कुंडू और और BITS के फैकल्टी मेंबर्स मौजूद थे। BITS के छात्र ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
मुख्यमंत्री डॉ. सावंत ने छात्रों और पुलिस टीम को बधाई देते हुए कहा कि ये टूल्स सिर्फ गोवा पुलिस ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए उपयोगी साबित होंगे। सरकार भविष्य में भी BITS पिलानी के साथ ऐसे तकनीकी प्रोजेक्ट्स में सहयोग जारी रखेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि “आज के दौर में तकनीक का दुरुपयोग बढ़ रहा है, ऐसे में जांच के लिए आधुनिक उपकरण बेहद जरूरी हैं। गोवा पुलिस पहले ही ‘क्विक पास’ और ‘डीप ट्रेस’ जैसे तकनीकी समाधान लॉन्च कर चुकी है। मुझे गर्व है कि गोवा पुलिस देश की सबसे तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस बलों में से एक है, जो ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप काम कर रही है।
“स्पॉट द स्कैम” क्या है?
यह AI आधारित टूल फर्जी वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स (APKs) को पहचानने और वर्गीकृत करने में मदद करता है। इसकी प्रमुख खूबियां हैं:
- वेबसाइट का यूआरएल, कंटेंट, SSL सर्टिफिकेट और डोमेन की विश्वसनीयता की जांच।
- AI आधारित स्कोरिंग सिस्टम जो वेबसाइट की सुरक्षा रेटिंग बताता है।
- ऐप्स के मेटाडेटा, परमिशन, सर्टिफिकेट आदि की जांच कर उन्हें सुरक्षित या खतरनाक बताता है।
- यह टूल आम जनता के लिए https://spotthescam.in/ पर उपलब्ध है और गोवा पुलिस व टूरिज्म वेबसाइट पर भी जोड़ा गया है।
“रैडिकल कंटेंट एनालाइज़र” क्या करता है?
यह टूल डिजिटल वीडियो और डॉक्युमेंट्स में कट्टरपंथी और नफरत फैलाने वाले कंटेंट की पहचान करता है। इसकी विशेषताएं हैं:
- हिंदी, इंग्लिश और उर्दू में कंटेंट की जांच।
- AI आधारित जांच मानक जैसे – उत्तेजक शब्द, भावनात्मक विश्लेषण, भाषण शैली, धार्मिक संदर्भ और उकसावे वाले निर्देशों की पहचान।
- रेड/येलो/ग्रीन कलर कोडिंग के साथ जोखिम स्तर की रिपोर्ट।
- यूट्यूब, X (ट्विटर), और फाइल अपलोड्स से डेटा का विश्लेषण करने की सुविधा।
- यह फिलहाल गोवा पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है।
