गाजीपुर की घटना लगातार सियासी मोड़ ले रही है। पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर योगी सरकार को घेरने में जुट गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 अप्रैल को गाजीपुर आ रहे हैं। उससे पहले शनिवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस मुद्दे को सियासी रंग दे दिया। कई मायनों में गाजीपुर की इस घटना को हाथरस की घटना से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, आत्महत्या और हत्या के आशंका के बीच वारदात सियासी रंग ले रही है।
गाजीपुर मर्डर केस (फोटो-@yadavakhilesh)
क्या था मामला?
दरअसल,14 अप्रैल की देर रात नाबालिग नेहा विश्वकर्मा अपने घर से गायब हुई और रात करीब दो बजे के आसपास गांव से ही कुछ दूरी पर लगे हुए सीसीटीवी कैमरे में उसका अकेले जाते हुए भी देखा गया है। इस दौरान कुछ घंटे के बाद उसने अपने पिता को फोन कर कुछ बातें भी कही थी। लेकिन, जब पिता ने दोबारा उस पर फोन किया तो फोन से बात नहीं हो पाई और उसके कुछ देर के बाद यानी की 15 अप्रैल को उसके पिता को डूबने की जानकारी पीआरबी 112 के माध्यम से प्राप्त हुई और जब परिवार के लोग जमानिया गंगा पुल के पास पहुंचे तो देखें कि उनकी बेटी मृत अवस्था में थी। फिर उस शव को निकाल कर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा था।
पुलिस ने डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमॉर्टम कराया। उस लड़की के पिता भी वंहा मौजूद रहे। बकायदा पूरी पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आपसी प्रेम-प्रसंग का मामला माना और मौत को आत्महत्या माना। लेकिन, पुलिस ने पिता की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मामले पर 20 अप्रैल को समाजवादी पार्टी, भीम आर्मी का जिला लेवल का डेलिगेशन एसपी और डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर संबंधित थाने के इंस्पेक्टर को हटाने की मांग की। इसके बाद अखिलेश यादव ने 21 अप्रैल को एक सपा का 11 सदस्यीय डेलिगेशन कटरिया गांव पहुंचा। अब स्वयं अखिलेश यादव पीड़ित परिवार से मिलने के लिए 29 अप्रैल को गाजीपुर आ सकते हैं।
आईजी वाराणसी और डीआईजी वाराणसी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने और सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया। मृतका के पिता का कहना है कि हम कानूनी करवाई से संतुष्ट हैं। आरोपी जेल भेज दिया गया है। आपको बता दें कि FIR में हत्या और दुष्कर्म का जिक्र नहीं है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे मामले को अगड़ा-पिछड़ा की लड़ाई माना जा रहा है। चूंकि, पीड़ित परिवार ओबीसी समाज से है और आरोपी अगड़ा समाज से है।
