Unnao News: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते गंगा एक्सप्रेसवे पर व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। लखनऊ-कानपुर नेशनल हाईवे के पास सोनिक में स्थित एक्सप्रेसवे का टोल बूथ और औद्योगिक सर्विस रोड बारिश के पानी में पूरी तरह जलमग्न हो गया। जलभराव के बीच ग्रामीणों द्वारा टोल के पास जाल डालकर मछलियां पकड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुख्य सचिव और 'यूपी स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन' के CEO मनोज कुमार सिंह खुद मौके पर पहुंचे और जलभराव की स्थिति का जायजा लिया।
स्थिति का जायजा लेने पहुंचे यूपी स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के CEO
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे CEO मनोज कुमार सिंह
अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने सोनिक के पास एक्सप्रेसवे और सर्विस रोड पर पानी के भराव का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्थाओं और प्रशासनिक अधिकारियों से जलनिकासी की मौजूदा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलनिकासी की समस्याओं को दूर करने के लिए पंपों की संख्या बढ़ाने और हाईटेंशन बिजली लाइन को ऊंचा करने के लिए संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान यूपीडा (UPEIDA), अडानी और पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर के वरिष्ठ प्रतिनिधि और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे।
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जलमग्न टोल पर ग्रामीणों ने पकड़ी मछली
36,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के सोनिक टोल प्लाजा पर करीब दो से तीन फीट तक पानी भर गया। पानी का भराव इतना अधिक था कि टोल बूथ के आसपास जलमग्न स्थिति बन गई। इसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने 'आपदा में अवसर' तलाशते हुए एक्सप्रेसवे के भरे पानी में जाल डालकर मछलियां पकड़ना शुरू कर दिया। ग्रामीणों द्वारा एक्सप्रेसवे पर मछली पकड़ने का यह नजारा कौतूहल का विषय बन गया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस (PRV) ने मौके पर पहुंचकर लोगों को एक्सप्रेसवे से हटाया।
29 अप्रैल 2026 को हुआ था उद्घाटन
उल्लेखनीय है कि मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले इस 594 किलोमीटर लंबे 6-लेन एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। महज कुछ महीनों के भीतर ही भारी बारिश के चलते सोनिक टोल और आसपास के हिस्सों में जलभराव तथा ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी के बाद अब यूपीडा और निर्माण एजेंसियां पानी को निकालने और मार्ग को पूरी तरह सुचारू करने के काम में जुटी हुई हैं।
