उत्तर प्रदेश में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है। राज्य के 13 जिलों के 173 गांव फिलहाल बाढ़ की चपेट में हैं और करीब 84,362 लोग प्रभावित हुए हैं। हालांकि राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, प्रदेश में बाढ़ की स्थिति अभी सामान्य और नियंत्रण में है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। इसी बीच मौसम विभाग ने 19 से 23 अगस्त तक प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। नई बारिश से निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने और राहत कार्य प्रभावित होने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित जिलों में जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, चिकित्सा सुविधा तथा जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
गंगा में उफान
13 जिलों में बाढ़ का असर है जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव के कुछ इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों में करीब 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र और 84,362 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। गंगा, यमुना, सरयू और राप्ती जैसी प्रमुख नदियां पहले से उफान पर हैं। अब तक 4,845 लोगों को प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। राज्यभर में 1,589 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं और 1,263 बाढ़ शेल्टर कैंप तैयार किए गए हैं। इनमें 41 कैंप इस समय इस्तेमाल में हैं, जहां 1,045 लोग रह रहे हैं। राहत आयुक्त कार्यालय का कंट्रोल रूम सभी प्रभावित जिलों के प्रशासन के संपर्क में है और 1070 हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों व सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
गोरखपुर में सरयू उफान पर
पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। गोरखपुर में सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि राप्ती नदी भी लगातार उफान पर है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाते हुए राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
सरयू के बढ़ते जलस्तर से खजनी और गोला तहसील के इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। राप्ती फिलहाल खतरे के निशान से 2.41 मीटर नीचे है। जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी रहा तो अगले एक-दो दिनों में गोला क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पानी पहुंच सकता है। फिलहाल आबादी वाले इलाकों में पानी नहीं घुसा है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और सिंचाई, राजस्व, स्वास्थ्य, पशुपालन व पुलिस विभाग की टीमें तैनात हैं।
बाढ़ की चपेट में प्रयागराज
संगम नगरी प्रयागराज में बाढ़ ने शहरी और ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करेली इलाके में एनडीआरएफ की टीमें बाढ़ प्रभावित घरों में फंसे लोगों को रेस्क्यू कर रही हैं। घरों की पहली मंजिल पर शरण लिए लोगों तक राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। कोरांव इलाके के कई गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। भोगन और बेलन नदियों के उफान के कारण कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। यहां भी राहत और बचाव अभियान जारी है। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
वाराणसी में बढ़ा गंगा का जलस्तर
वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। सभी 84 घाटों का संपर्क पहले ही टूट चुका है और अब कई घाट पानी में डूबने लगे हैं। जलस्तर बढ़ने से धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। आरती अब छतों पर हो रही है, जबकि अंतिम संस्कार के लिए भी लोगों को गलियों और छतों का सहारा लेना पड़ रहा है। फिलहाल गंगा का जलस्तर करीब 67 मीटर है और इसमें करीब 5 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है। जलस्तर बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले दिनों में तटवर्ती इलाकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
